Wednesday, December 9, 2015

मेरी शादी


मेरी पहली मंगेतर वाणी, तन, मन, व्यवहार और दिमाग से सुन्दर थी। मैं अपनी पहली मंगेतर के साथ साल भर फोन पर बात किया था। लेकिन जल्दी कभी अश्लील शब्दों का प्रयोग नहीं करता था। पप्पी झप्पी का बात करता था। और बात करने पर बहुत ही खुश रहता था; जितना कि मैं अपनी माँ और बहनों से बात करके पक जाता था। लेकिन मेरे पीठ पीछे मेरे माँ बाप या मेरे मंगेतर के माँ बाप चुपके से मेरी सगाई तोड़ दिया। 

मेरी दूसरी मंगेतर पहली मंगेतर की विल्कुल उल्टा थी। दूसरी मंगेतर के परिवार वाले भी पहली मंगेतर के परिवार वाले से विल्कुल उल्टे थे। दूसरी मंगेतर के परिवार वाले सगाई में पहली मंगेतर के परिवार वालो से विल्कुल उल्टे व्यवस्था किये थे। यह सब मेरे पहली मंगेतर के ईच्छा के कारण हुआ होंगा। जैसा कि मैंने अपने दुसरे पोस्ट में बताया कि मेरे जीवन में घटनाये दुसरो के ईच्छाओ के अनुसार घटिक होता है। विश्वास करो या न करो। सुपरनैचुरल चीज नेचुरल रूप से होता है। 

अब मैं स्टार्ट कर रहा हूँ रेगुलर जॉब से इस्तीफा देने से एक दिन पहले से। भारत मैत्रीमोनी वेबसाइट के माध्यम से झारखण्ड की एक सुन्दर और काफी गोरी लड़की का प्रोफाइल मैंने देखा। प्रोफाइल में उन्होंने अपने आप को सुनार बताया था। चूँकि मेरे पड़ोसी सुनार है। सुनार के परंपरा हम लोग के परम्परा से काफी हद तक मेल करता है। इसलिए मुझे मेरे जाति में लड़की न मिलने पर और उन्हें बिहारी समझते हुए मैंने स्वयं अंतरजातीय शादी की प्रस्ताव रखा था। 

लड़की वाले मुझे देखने आये। मैंने नहीं आशा किया था की पहली मुलाकात में लड़की की माँ भी आयेगी। हमारे परंपरा के अनुसार पहली मुलाकात में लड़की (या लड़के) के तरफ से पुरुष मिलते है। अगर लड़का (या लड़की) थोड़ा पसंद पड़ा। तभी ही औरते मिलकर कर फाइनल निर्णय करती हैं। लड़की की माँ मुझे देखते ही भड़क गयी। और मेरे मुह पर ही मेरे तरफ हाथ कर के जोर जोर से मुझे डाटते हुए सुनाने लगी, "लड़का काफी पतला है। यह विल्कुल ही बेकार लग रहा है। ऐसे लडके को देखने के लिए हमने क्यों कार हायर किया? हमारे ३५० रु बर्बाद हो गए।"। मैं बहुत दुखित हुआ। क्योकि भारत मैत्रीमोनी वेबसाइट पर अपना एक महीने के अन्दर के लेटेस्ट फोटो लगाया था। क्या उन्होंने मेरा फोटो नहीं देखा था? क्या बिना फोटो देखे आये थे? दूसरी बात यह है कि मैंने थोड़े ही उन्हें बोला था कि वे लोग कार में आये। वे लोग मयूर विहार से रिक्शे से भी आ सकते थे। ऐसे मैं कभी कभार कार हायर करके कंपनी जाता था। जिसका रिफंड मैं कंपनी से नहीं लेता था। कंपनी में देर तक रुकने पर कार हायर करके घर जाने पर कंपनी पैसे रिफंड कर देती थी। उस समय मैं दाढ़ी बनाने और नहाने ही जा रहा था। तब वे लोग आये थे। मैं भी उन दिनों अपने पतले होने पर दुखित रहता था। इसलिए मुझे भी लगा कि मैं बेकार लग रहा हूँ। उनसे पूछ कर मैं नहाने चला गया। जब मैं नहा रहा था। तब वह औरत मेरी मकान मालकिन से मेरे बारे में छानबीन कर रही थी। वह पूछ रही थी, "यह कहाँ का है? यह यहाँ कब से रहना स्टार्ट किया है? वगैरा।"। यह सब चीज बाद में मेरी मकान मालकिन ने बताया कि वह औरत मुझे सम्मान न देते हुए बड़े ही कड़े शब्दों में मेरी जानकारी ले रही थी। यह विल्कुल ही गलत था। मेरे यहाँ के परंपरा के अनुसार पहले तो उन्हें मेरे बारे में कोई भी जानकारी करनी नहीं चाहिए थी जब तक न मैं उन्हें पसंद आऊ। बल्कि यह मान कर चलना चाहिए कि मैंने जो भी बोला सत्य बोला। विल्कुल वैसे ही जैसे कि जॉब इंटरव्यू में बैकग्राउंड चेकिंग कैंडिडेट के टेक्निकल इंटरव्यू के बाद करते है। फिर भी अगर वह औरत मेरे बारे में जानकारी चाहती भी थी तो उसे तमीज के साथ मेरे बारे में जानकारी करनी चाहिए थी। मेरे यहाँ के परंपरा के अनुसार दामाद को थोड़ा सम्मान देते है। जब मैं नहा कर आया। तब मैं उस औरत को थोड़ा पसंद आने लगा। 

लड़की के बाप का नाम शायद राजेंद्र प्रसाद नाम है। इस वक्त मुझे याद नहीं आ रहा। लड़की के फूफा मयूर बिहार में रहते थे। वे MD थे। शायद उनका नाम भी राजेंद्र प्रसाद था। दूसरे दिन लड़की के बाप फ़ोन करके मुझे सम्मान न देते हुए मुझे अपने बहनोई के यहाँ बुलाया। फिर मैं यह सोचते हुए उनके पास चला गया कि शायद वे लोग पच्छिमी उत्तर प्रदेश वगैरा के है। झाड़खंड में नौकरी के कारण बसे होंगे। इसलिए इनके परंपरा अलग है। मैं वह जैकेट और शर्ट पेंट पहना। जिस जैकेट और शर्ट पेंट में मैंने अपना लेटेस्ट फोटो खिचवाया था। जो कि मेरे अलोक गुप्त प्रोफाइल पेज पर है। जिससे उन्हें लग जाए कि मैं कोई चीटिंग नहीं किया है। जब मैं उन्हें फ्लैट के नीचे पहुंचा। मैंने उन्हें मोबाइल से कॉल किया। तब लड़की के बाप ने बोला कि आओ भैया, इधर आ जाओ। होने वाले ससुर के मुह से मैं भैया सुना तो मुझे और लगा कि ये लोग पच्छिम उत्तर प्रदेश के होंगे। क्यों कि हमारे यहाँ कोई भी अपने होने वाले दामाद को भैया नहीं बोलता है। बातो के दौरान मैंने बताया कि मैं पंजाब के मोहाली सिटी में थे। वहाँ के लोग समृद्ध हैं। वहाँ सुन्दर सुन्दर कोठियाँ हैं। घर के कोई न कोई सदस्य US, UK वगैरा रहता है। उनके यहाँ इसलिए रूम खाली रहता है। और वे लोग किराये पर रूम काफी सस्ते में देते है। मोहाली के ढाबो में खाना अच्छा मिलता है। कंपनी से कोठी तक आने पर कोई भी ट्रैफिक का सामना नहीं करना पड़ता है। जॉब करने पर कम पैसे में वहाँ बहुत ही अच्छे तरीके से रहा जा सकता है। जो कि दिल्ली में पैसे खर्च करने पर भी सम्भव नहीं है। लेकिन जब कंपनी में पार्टी होती है। तो वहाँ के लोग पंजाबी गाना बजा देते है; जो कि मुझे नहीं आती है। वे लोग भांगड़ा डांस करते हैं; जो कि मुझे नहीं पसंद है। मैं लड़की वालो को झारखंड का समझते हुए यह भी बता दिया कि मेरा रूममेट पंजाबी था। वह बिहारियों को उतना पसंद नहीं करता हैं। इस आधार पर मैं मोहाली की प्रशंसा और शिकायत जैसा कि यहाँ लिखा हूँ; दोनों किया। (ऐसे बिहारियों को उतना पसंद नहीं करने वाली बात इस पोस्ट में जिक्र नहीं करना चाहिए था। लेकिन मुझे यहाँ ईमानदारी के साथ आज कहना पड़ा।)। शायद लड़की का फूफा पंजाबी था। यह मुझे नहीं मालूम था। फिर मैं लड़की के बाप से पूछा कि क्या आप लोग इधर के यानि पच्छिम उत्तर वगैरा के हैं? लड़की ने बाप मुझे हाँ बोलते हुए पच्छिम उत्तर प्रदेश के किसी जगह का नाम लिया। फिर लड़की की फुआ आई और बोली कि नहीं हम लोग बिहारी हैं। अपने भाई के तरफ इशारा करते हुए बोली कि ये अपने आप को बिहारी बोलने में शर्म महसूस कर रहे हैं। लड़की की बाप अपनी बहन के बात सुनकर चुप हो गया। और उस औरत को लगा कि मैं उसके पंजाब का शिकायत किया हूँ। इसलिए वह चालू हो गयी और बताई कि कही के लोग गलत नहीं होते हैं लोग। पंजाबी खून गरम होता है और बिहारी खून ठंडा होता है। अंग्रेजो के समय बिहारियों को गुलाम बनाया गया। ऐसे तो मैं न बिहारी था और न पंजाबी। लेकिन वह औरत जिस तरीके से बिहारियों की खिचाई की; मुझे यह कुछ अच्छा नहीं लगा। क्योकि मुझे जहाँ तक लगता है कि लड़की का बाप सही कह रहा था। वे पच्छिम उत्तर प्रदेश के थे। 

फिर वे लोग मुझे लड़की से मिलवाए। मैंने अपने बारे में लड़की को थोड़ा बताया। वह लड़की अपने बारे में कुछ बताने के बजाये मुझसे अटपटा सवाल कर रही थी। यह लड़की मेरी पहली मंगेतर की तरह केवल तन से गोरी और सुन्दर थी। मुझे पहली मंगेतर की तरह कोई लड़की नहीं मिल रही थी। वास्तव में कोई ऐसी लड़की नहीं मिल रही थी। जो कि कुछ हद कर मेरे साथ जोड़ी बैठे। वास्तव में लड़की मिल ही नहीं रही थी। मैं लड़की ढूढ़ते ढूढ़ते तंग हो गया था। सच कहाँ जाये तो मेरी बॉडी के अनुसार यह लड़की अच्छी थी। ऐसे मैं भी शादी के बाद मोटा हो जाता। ऐसे लड़की के फूफा मुझसे अच्छा व्यवहार किया था। लेकिन मैं लड़की के माँ, बाप और फुआ से पक चूका था। लड़की के माँ और बाप मुझसे ऐसे व्यवहार कर रहे थे कि वे अपनी लड़की मुझे चोदने के लिए दे रहे हो। वे मेरा कोई कद्र ही नहीं कर रहे थे। तब मैंने निर्णय किया कि लड़की के माँ, बाप, फुआ वगैरा के व्यवहार जाये भाड़ में। यहाँ तक लड़की का भी व्यवहार जाये भाड़ में। यह लड़की बस चोदने के लिए सही है। बस यह मेरी ट्राफी पत्नी की तरह रहेगी। ऐसा ख्याल जीवन में अपने पत्नी के बारे में पहली बार आया। मेरा वाइफ के प्रति पसंद का तरीका उस वक्त राम (about.me/ShriRamGupta) से अलोक (about.me/AlokGuptaHere) की ओर मुड़ रहा था। जो कि मैं उन दिनों अपना नाम बदलना चाहता था। और मैं तुरंत लड़की में बाप से अपने तरफ से लड़की पसंद बोल दिया। यह हाँ बोलने वाला भी जीवन में पहला बार हुआ। 

लड़की के बाप नीचे मुझे छोड़ते वक्त मेरे घर परिवार को बिना देखे मेरे बाप का औकात भी इनडायरेक्ट वे में नाप दिया। जब कि वे सब मेरे लिए खाने में घटिया व्यवस्था किये थे। वे सब निहायत फालतू लगे। मुझे तो ऐसा प्रतिक होता है कि वे दलित हो। अगर वो नहीं हो; तो बहुत बहुत सॉरी दलित कम्युनिटी को; और मैं शर्मिंदा महसूस करूँगा। अगर ये सुनार हो तो भाड़ में जाये सुनार कम्युनिटी; जिनके कारण मैं दलित कम्युनिटी को बेवजह दोष दे रहा हूँ; और दलित कम्युनिटी से गाली सुनने का काम कर रहा हूँ। मेरा होम टाउन सुनार बाहुल्य है। या तो मैं सुनारों को समझ नहीं पाया, या ये स्पेशल केस थे। फिर लगा कि अब मुझे इस्तीफा देकर ठंडे मन से सोचना चाहिए। ऐसे भी इसी लड़की को देखने के लिए छुट्टी मांगने पर एक दिन पहले अपने बॉस मिस्टर जीतेन्द्र कपूर से रगड़ भी हुआ था। फिर मेरे अन्दर भी फालतूगिरी आ गया। यह कहने की मैं इस्तीफा देकर अपनी शादी के लिए अपना बॉडी बनाना चाहता हूँ और बैठ कर सोचना चाहता हूँ, बल्कि इस्तीफा देते हुए अपने बॉस से रगड़ वाली बात को रखा। और ओड वे में कंपनी से निकला। 

(जारी)

सुनाली अगरवाल ने क्या जोक मचाया? मैंने अपने दुसरे ब्लॉग में डिटेल में उसके बारे में लिखा है। सुनाली अगरवाल देखने में थोड़ी कानी थी। फिर भी मैंने सोचा कि क्यों न इससे शादी के लिए कोशिश किया जाये। यह कंजूस भी है। अगर यह केवल खाने के लिए दुसरे को इतना दूर बोला सकती है। तो अगर मैं इसे डिनर के लिए प्रस्ताव रखता हूँ। तो यह तैयार हो जायेगी। लेकिन मैंने जब उससे पूछा तो वह मुझे बोली कि वह एयरप्लेन में है। फिर मैं दुबारा उसके सामने डेट के लिए प्रस्ताव रखने में आलसी हो गया। 

(जारी)

चूँकि सब जानते है कि मैं शादी के लिए व्याकुल था। कभी कभार मैंने यह बात अपने डायरेक्ट क्लाइंटो से भी शेयर किया। जैसे कि नवीन छक्कर आये थे। मैंने उनसे एक दुसरे के पर्सनल लाइफ के बारे में बात किया था। मेरी एक क्लाइंट थी। जो की काली थी। उसने मुझसे शादी के लिए स्वयं प्रस्ताव रखा। मैंने उससे बोला कि ऐसे तो हम लोग प्रोजेक्ट पर चैटिंग करते रहते है। लेकिन कभी भी एक दुसरे से एक दुसरे के पर्सनल लाइफ की बात उतना नहीं किये। वो बोली, "मैं काली हूँ। क्या इसलिए मैं तुम्हे पसंद नहीं हूँ?"। मैंने उससे बोला कि ऐसी बात नहीं। बिना एक दुसरे के आमने सामने हुए ही मैं कैसे हाँ कह दूँ। हम लोग कही किसी माल वगैरा में एक दुसरे से मिला जाये। उसने बोला, "इन दिनों मेरे सारे कपडे पुराने हो गए हैं। मुझे कुछ शौपिंग करनी है"। मैंने उससे बोला कि कोई बात नहीं मैं तुम्हे शौपिंग करवा दूंगा। वो बोली, "क्या तुम्हारे पास क्रेडिट कार्ड है?"। मैंने बोला कि हाँ मेरे पास क्रेडिट कार्ड है। वो बोली, "क्या मेरे लिए एक ऐड-ओन कार्ड बनवा सकते हो?"। मैं कन्फ्यूज्ड था। मैंने उससे बोला कि हाँ मैं तुम्हारे लिए ऐड-ओन कार्ड बनवा तो सकता हूँ। लेकिन किस रिश्ते से मैं तुम्हारे लिए ऐड-ओन कार्ड बनवाऊगा? मैं बहन के रिश्ते से तो बनवा नहीं सकता हूँ। वो बोली, "अपने वाइफ के रिश्ते से मेरे लिए ऐड-ओन कार्ड बनवा लो। क्योकि अगर तुम्हे मेरे काले होने से एतराज नहीं है। तो मैं तुम्हे जरुर पसंद पर जाऊँगी। अगर तुम्हे मैं नहीं पसंद पड़ती हूँ। तो तुम अपने कार्ड को कैंसिल करवा लेना"। फिर मैंने एक ऐड-ओन कार्ड उसके लिए बनवा लिया। उसके बाद मैंने बोला कि अब मिला जाये। जिससे कि मैं तुम्हे ऐड-ओन कार्ड दूँ। वो बोली कि पहले तुम मुझे ऐड-ओन कार्ड का नंबर दे दो। उस नंबर को यूज़ कर के इन्टरनेट पर ही अपने के लिए सूट (कपड़ो) की शौपिंग करुँगी। मैंने उसे ऐड-ओन कार्ड का नंबर थमा दिया। और उसके सूट की शौपिंग कम्पलीट होने का वेट करता रहा। और वो मुझे हमेशा कल-कल कर के टालती रही। बाद में मैंने क्रेडिट कार्ड में बिल में उसके द्वारा कुछ शौपिंग देखा। मैंने बोला कि तुमने शौपिंग तो किया है। वो बोली, "और शौपिंग करना है"। काफी दिन तक कई बार उसके टालने के बाद मुझे लग गया कि वह नहीं मिलने वाली है। और अपना भी सेल्फ रेस्पेक्ट होता है। तब मैंने उससे मिलने के लिए पूछना बंद कर दिया। 

इस प्रकार अपनी शादी के लिए काली से कंदेरी सब कोशिश किया। उसके बाद मैंने तय कर लिया कि मैं अब शादी के लिए किसी की झासे में नहीं आऊँगा। 

अंत में पीके फिल्म के बाद, मेरे पास भारत मैत्रीमोनी से बहुत सारे कॉल आने लगे। तब मुझे लग गया कि यह सब साजिस है मुझे फ़साने की। मैं कह देता था, "मैं ऐसे ही अपना प्रोफाइल छोड़ा हुआ हूँ। मैं अपने प्रोफाइल को डिलीट नहीं मारना चाहता हूँ। मैंने अपना प्रोफाइल इन एक्टिव रखा हुआ है। भविष्य में अगर मुझे जरुरत पड़ेगी तो मैं उसे एक्टिव कर के यूज़ करूँगा"। फिर भी उनके बार बार कॉल करने पर मैं बोल देता था, "अच्छा, मैं अपना अकाउंट चेक कर लूँगा। और उसके बाद आपको कॉल करूँगा। आपको मुझे कॉल करने की कोई जरुरत नहीं है।"। यह विल्कुल ही अबनार्मल इवेंट था। क्योकि सालो से तो भारत मैत्रीमोनी वाले कॉल तो किये नहीं थे। एकाएक वे सब मुझे बार बार कॉल करने लगे। वह भी कुछ ही महीनो में बहुत बार। 
मुझे नीचे लिखे नम्बरों से कॉल आये-
09381007752 <नाम नोट नहीं कर पाया>
01166760100 <नाम नोट नहीं कर पाया>
07299934815 <नाम नोट नहीं कर पाया>
01130192773 नेहा 
01166787237 <नाम नोट नहीं कर पाया>
01166067420 शिखा शेखर
01166067423 <नाम नोट नहीं कर पाया>
08010815355 अभिषेक तिवारी
01166414800 समीर और राहुल
01130192781 राहुल
01130192782 <नाम नोट नहीं कर पाया>

अंग्रेजी संस्करण:
My Marriage

अंत में, मैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कहूँगा कि पशु पक्षियों को मत खाओ; और उन्हें मत तंग करो। अगर गाय भैस वगैरा को पालो तो उन्हें मान दो; और उनके गले में मत रस्सी बाधो। नहीं तो अपने पतन की रफ़्तार तेज कर लिए। यह मेरे समूह विवाद सिद्धांत के आधार पर है; जो कि मैंने अपने रूम मे जिक्र किया था। 

(hutiaram.blogspot.in)

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