Sunday, December 20, 2015

आत्मकथा


मैंने अपना नाम Ram (राम) से hutia Ram इसलिए बदला। क्योकि जब मैं क्राइम दूर करने का प्रस्ताव रखता। मेरा क्राइम दूर करने के प्रस्ताव ऑलमोस्ट असंभव सा दिखने से और श्रेष्ठता की भावनाओ से पीड़ित होने के कारण जल्दी कोई मेरे बात पर नहीं विश्वास करता। और मैं मजाक बनता। और मुझे गलियां खाने को भी मिलती। और जब मुझे सेमिनार में सोशल सिस्टम को एक्सप्लेन करना होता। तो बहुत ही अश्लील टॉपिक आते। लोग मुझे गलियां भी देते। इसलिए इसलिए पहले ही अपने नाम ही ऐसा रखा था कि गाली असर नहीं होता। ऐसे भी औरतो के भला करना एक चुतियापा ही है। मेरे 'कर भला, तो हो बुरा' पोस्ट को पढो। साथ ही क्राइम दूर करने का मतलब इस डायनेस्टी से टक्कर लेना है। इसलिए डायनेस्टी न केवल मुझे मौत देती; बल्कि मेरी ऑनलाइन प्रोफाइल भी मेरे मरने के बाद बंद करवा सकती थी। इसलिए मैं अपने राम नाम के ऑनलाइन प्रोफाइल बंद करवाने का खतरा क्यों लेता? 

(जारी)

इस पोस्ट से जुड़े लिंक:
श्री राम गुप्त का आत्मकथा (shriramgupta.blogspot.com/2015/12/blog-post_19.html)

इस पोस्ट से जुड़े पोस्ट:
१. मेरी शादी
२. मेरे कमाई के इतिहास
३. सहायता
४. कर भला, तो हो बुरा
५. षड़यंत्र
६. क्या मैं? क्या औरत और अपवर्क वेबसाइट?
७. कहाँ जाऊ मैं?

अंग्रेजी संस्करण:
Autobiography

अंत में, मैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कहूँगा कि पशु पक्षियों को मत खाओ; और उन्हें मत तंग करो। अगर गाय भैस वगैरा को पालो तो उन्हें मान दो; और उनके गले में मत रस्सी बाधो। नहीं तो अपने पतन की रफ़्तार तेज कर लिए। यह मेरे समूह विवाद सिद्धांत के आधार पर है; जो कि मैंने अपने रूम मे जिक्र किया था। 

(hutiaram.blogspot.in)

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