मैंने बोला था- गांडी जो है, तुम सब का बाप, आत्महत्या करने की कोशिश किया; और यह गांडी डायनेस्टी भीख में लेकर आया। यह गांडी डायनेस्टी आते ही चिल्लाना स्टार्ट किया 'मारो। काटो।'; और पंजाब और बंगाल के सीमा पर खून खराबा हुआ। औरतो की इज्जत लुटी गयी। इज्जत लुटवाने के बाद भांड बने पंजाबी और बंगाली। वे भांड नगरी में पहुचे; और भांड काल का सूत्रपात हुआ। ऊपर के पैराग्राफ में किस फ्रेज में मैंने गलत बोला है? ऐसे भी मैं ऊपर के पैराग्राफ को समझाने जा रहा हूँ। पहली बात यह है कि गांडी तुम सवा बिल्लिओन्स का बाप है। क्योकि तुम सब उसे राष्ट्रपिता बोलते हो। जिसका मतलब 'राष्ट्र का पिता' के रूप में निकाला जा सकता है। लेकिन राष्ट्र का कोई पिता तो हो नहीं सकता है; क्योकि राष्ट्र एक निर्जीव चीज है। इसलिए इसका सही मतलब 'राष्ट्र के नागरिको का पिता' के रूप में निकाला जा सकता है। तो मैंने अगर गांडी को तुम सवा बिल्लिओन्स का बाप बोला; तो कहाँ गलत बोला? गांडी ने आत्महत्या करने की कोशिश किया था; बिल्कुल वैसे ही, जैसे कि इरोम चानू शर्मिला सालो से करती है; और मैंने आत्महत्या करने की दो बार कोशिश किया। गांडी के आत्महत्या करने और इरोम चानू शर्मिला के आत्महत्या करने में फर्क यह है कि ब्रिटिश गवर्मेंट गांडी की बात सुनती थी। जब कि इरोम चानू शर्मिला जेल की हवा काटती है। गांडी के आत्महत्या करने और मेरे आत्महत्या करने में फर्क यह है कि गांडी को आत्महत्या करने के लिए किसी ने उसे उकसाया नहीं; और उसके ब्रिटिश गवर्नमेंट से विद्रोह के करने के वावजूद भी, जब वह आत्महत्या करने की कोशिश किया तो ब्रिटिश गवर्नमेंट उसे बार बार बचाने की कोशिश की। जब कि मैंने तो गांडी डायनेस्टी से कभी विद्रोह किया ही नहीं; फिर भी मुझे तो आत्महत्या करने के लिए बाध्य किया गया। क्योकि मेरे ऊपर पीके और 'बजरंगी भाईजान' जैसे फिल्मे बना कर; और मुझसे भाग्य पाकर; और ५०० करोड़ से ऊपर कमा कर; मेरे मौत के लिए उन्होंने मेरे अगेंस्ट साजिस रचा; और उन्होंने आत्महत्या के लिए उकसाया; जो कि प्रेजिडेंट ऑफ़ इंडिया को भी मालूम है। गांडी यह डायनेस्टी भीख में लेकर आया। क्योकि गांडी ईशा मसीह का कोई अहिंसा का सिध्दांत नहीं पालन किया; बल्कि पाखंड रचा। गांडी कैसे पाखंडी है; यह मेरे दुसरे पोस्ट को पढो; तो यह स्पस्ट हो जायेगा। अगर वह ईशा मसीह का अहिंसा का सिध्दांत का पालन करता; तो ब्रिटिश गवर्नमेंट से बात कर के; और उन्हें अपने बातो से संतुष्ट करके गांडी यह डायनेस्टी लेकर आता। क्योकि ब्रिटिश गवर्नमेंट तो हमेशा गांडी से बात करने के लिए तैयार रहती थी; और ब्रिटिश गवर्नमेंट की भी। जब कि इरोम चानू शर्मिला से तो गांडी की डायनेस्टी (इंडिया) बात ही नहीं करना चाहती है। मैं भी अहिंसा के सिध्दांत का पालन करते हुए, मैं गांडी डायनेस्टी से पूछना चाहता हूँ कि मैंने क्या बिगाड़ा कि तुम मेरा जान लेकर तुम मेरे दादा के वंश को खत्म करना चाहते हो? मेरी बात तुम्हे बुरा क्यों लगी? अगर मेरी बात तुम्हे बुरी लगी; तो तुम मुझे सीधे मना करने के बजाय मेरे अगेंस्ट साजिस क्यों रची? गांडी डायनेस्टी जब आयी। तब यह मारो काटो नहीं चिल्लाती; तो मार काट मचता ही नहीं। मानो न मानो यह मार काट के पीछे गांडी डायनेस्टी ही है; और कोई कारण नहीं है। और सब कोई जानता है कि पंजाब और बंगाल के सीमा पर खून खराबा हुआ; और इज्जत भी लुटी गयी थी। चन्द्रप्रकाश द्विवेदी द्वारा निर्देशित पिंजर फिल्म को देख लो; तो तुम्हे मालूम चलेगा कि बहुत से औरते पाकिस्तान से गर्भवती आई थी। यह मेरा अपना कुछ नहीं कहना है; बल्कि पिंजर फिल्म बोलती है। ग्रामीण क्षेत्र (Rural area) में सेलिब्रिटी को भांड बोला जाता है। ग्रामीण क्षेत्र (Rural area) में, इन दिनों, इन्हें हीरो और हीरोइन भी बोला जा रहा है। ऐसे तो हेरोइन एक नशे की चीज यानि प्रतिबंधित दवा होता है। नगरीय क्षेत्र (Urban area) में, इन्हें पहले एक्टर और एक्ट्रेस बोला जाता था; अब इन्हें सेलिब्रिटी बोला जाता है। ऐसे तो सेलिब्रिटी एक ब्रॉड टर्म है। इसमे तो नेता, खिलाडी वगैरा भी आते है। मुझे मजाक बना कर आमिर खान ने पीके बनाया और सलमान ने बजरंगी भाईजान बनाया। इस प्रकार मुझसे वे भाग्य पाए और प्रत्येक ५०० करोड़ से ज्यादे कमाए। और मुझे एक पैसा भी उनसे नहीं चाहिए था। फिर भी वे वही पैसे मेरे अगेंस्ट साजिस में खर्च कर रहे हैं। इस आधार उन्होंने दिखा दिया कि भांड तो भांड ही रहेंगे। चाहे वे अपने आप को सेलिब्रिटी कहलाये या भगवान कहलाये। चलो यहाँ से अब मैं उन्हें सेलिब्रिटी पुकारता हूँ। पुराने सेलिब्रिटी को उठाकर देख लो कि वे मुख्यरूप से बंगाल और पंजाब मूल के हैं; और थोड़ा बहुत मुंबई के हैं। यह विल्कुल ही भांड काल है। ये सेलिब्रिटी जैसे चाहे; ये सेलिब्रिटी वैसे समाज क्या, गांडी डायनेस्टी के कार्य प्रणाली को घुमा सकते हैं। आज मेरे अगेंस्ट साजिस के केस में भी यह साफ साफ दिख रहा है। मैंने बोला था- तुम सवा बिल्लिओंस श्रेष्ठता के भावनाओ से ग्रसित हो। मैंने यह भी गलत नहीं बोला था। मैं औरतो के अगेंस्ट सारे क्राइम दूर करने का जो दावा किया था। वो तुम सब को असंभव दिख रहा है। इसलिए तुम सब का सोचना है कि मैं बकवास कर रहा हूँ। यह विल्कुल वैसे ही है। जैसे की सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में जब एक सॉफ्टवेयर डेवलपर श्रेष्ठता के भावनाओ से ग्रसित होता है; और जब उसे सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट में कोई फंक्शनलिटी इम्प्लीमेंटेशन असंभव सा दीखता है; तो वह अपने बॉस से सीधे कहता है कि यह सैद्धांतिक रूप से संभव ही नहीं है; लेकिन जब वह हो जाता है; तो वो मुंह बा देता हैं। मेरे अधीनस्थ सॉफ्टवेयर डेवलपर ऐसे बोल भी चुके है। मैंने बोला था- या तो मैं सलूशन हूँ या इस्लाम सलूशन है। यह भी गलत नहीं है। दो चार पीढ़ी के बाद यह साफ़ साफ़ दिखेगा कि इस्लाम एक सलूशन है। औरते देख लेंगी कि मैंने ऐसे ही बकवास किया था कि सही प्रेडिक्ट किया था। (जारी) इस पोस्ट से जुड़े पोस्ट: १. पाखंडी की पहचान। २. मैंने अपने आप को विश्वामित्र क्यों कहा? अंग्रेजी संस्करण: I Said Nothing Wrong अंत में, मैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कहूँगा कि पशु पक्षियों को मत खाओ; और उन्हें मत तंग करो। अगर गाय भैस वगैरा को पालो तो उन्हें मान दो; और उनके गले में मत रस्सी बाधो। नहीं तो अपने पतन की रफ़्तार तेज कर लिए। यह मेरे समूह विवाद सिद्धांत के आधार पर है; जो कि मैंने अपने रूम मे जिक्र किया था। (hutiaram.blogspot.in)
Monday, December 21, 2015
मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा।
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