Tuesday, December 1, 2015

सहायता


किसी के लिए तभी कुछ करो। जब नीचे के सारी शर्त पूर्ण हो-
०१. वही करो; जो उसे समस्या है। 
०२. वह उस समस्या के समाधान चाहे भी।
०३. वह चाहे भी किसी की सहायता।
०४. उस व्यक्ति विशेष का नेचर समझ लो। अगर वह तुम्हारे सहायता का महत्त्व नहीं देने वाला। तो भविष्य में तुम्हारे साथ क्या क्या हो सकता है, वो सम्भावनाये सोच कर सहायता करने के लिए तैयार रहो। नहीं तो तुम्हे भविष्य में बहुत दुःख होगा। 
०५. आकस्मिक घटना हो तो; तुरंत करो। अगर आकस्मिक घटना न हो तो उससे पूछ कर निश्चिन्त हो लो कि वह तुम्हारी सहायता लेना चाहता है? और तुम्हारा सहायता लेना चाहे; तभी ही।  
०६. तुम्हारे सहायता के प्रस्ताव क्लियर हो। अगर एक बार में ज्यादे शब्दों में अपने प्रस्ताव को नहीं रख सकते। तो शीर्षक रखो। लेकिन सहायता के प्रस्ताव के दौरान शीर्षक को समझाने के लिए हमेशा तैयार रहो। 
०७. अगर तुम्हारे प्रस्ताव के दौरान वह तुम्हे मना न करे। तो प्रस्ताव रखने के प्रयास को जारी रख सकते हो। 
०८. अगर तुम प्रस्ताव किसी समूह को दे रहे हो। तो प्रस्ताव उस समूह को रिप्रेजेंट करने वाले को देना चाहिए। अगर उस समूह के रिप्रेजेन्टेटिव उस प्रस्ताव में इंटरेस्टेड न हो या उस समूह के रिप्रेजेन्टेटिव किसी दुसरे के अधीन हो और तुम्हे लगता है कि प्रस्ताव रखना ही ब्यर्थ है तो उस समूह के किसी व्यक्ति के समक्ष प्रस्ताव रख सकते हो।
०९. अगर प्रस्ताव उस समूह के किसी भी व्यक्ति को देना चाहते हो तो ऐसे जगह पर दो जहाँ वे लोग उस समस्या पर विचार करे। 
१०. अगर तुम्हारा प्रस्ताव उस समूह को समझ में नहीं आता हो। तो प्रस्ताव के तरीके जैसे कि शीर्षक वगैरा बदल दो। 
११. तुम्हारे सहायता के प्रस्ताव को महत्व न दे और तुम्हारे ही अगेंस्ट साजिस प्रारंभ कर दे। तो तुरंत प्रस्ताव को रोक दो।  
१२. अगर वह तुम्हे डरा कर तुमसे सहायता लेना चाहे। या तो मना कर दो या गलत तरीके से सहायता कर दो। जिससे की उसकी सहायता लेने के लिए दुसरे को डराने की आदत छुट जाये। 
१३. सहायता के दौरान मौखित या लिखित वार्तालाप के लिए तैयार रहो। जिससे कि वह तुम्हारे सहायता के वीच में कुछ चेंज चाहता हो। 

निचे के केस में किसी के लिए वह मत करो - 
०१. जो उसे समस्या नहीं है।
०२. अगर उसे समस्या है। लेकिन वह उस समस्या के समाधान न चाहे।
०3. अगर उसे समस्या है। और वह उस समस्या के समाधान चाहे। लेकिन वह किसी की सहायता न चाहे।
०४. अगर उसे समस्या है। वह किसी की सहायता चाहे भी। आकस्मिक घटना न हो; बल्कि तुम्हारे पास पर्याप्त समय है कि तुम उसे साफ़ सुथरे शब्दों में बता सकते हो कि तुम उसके लिए फला सहायता करने जा रहे हो; फिर भी तुम उसे नहीं बताते हो। 
०५. अगर उसे समस्या है। वह किसी की सहायता चाहे भी। आकस्मिक घटना न हो; बल्कि तुम्हारे पास पर्याप्त समय है कि तुम उसे साफ़ सुथरे शब्दों में बता सकते हो कि तुम उसके लिए फला सहायता करने जा रहे हो। और तुम उसे बताते हो; लेकिन पूछने पर वह मना करे। 
०६. अगर उसे समस्या है। वह किसी की सहायता चाहे भी। आकस्मिक घटना हो; लेकिन सहायता के दौरान तुम उसे साफ़ सुथरे शब्दों में बात नहीं कर रहे हो; जो की तुम कर सकते हो। 

उदाहरण तौर पर:
०१. मैं सवा बिल्लिओन्स के ४९% औरतो के ऊपर क्राइम के समस्या को देखा। क्योकि गांडी डायनेस्टी के न्यूज़ मीडिया उनके ऊपर क्राइम दूर करने के लिए न्यूज़ डिबेट कर रही थी। 
०२. इस न्यूज़ डिबेट में औरते भी भाग ले रही थी। इससे मुझे लगा कि औरते चाह भी रही है कि उनके ऊपर से क्राइम दूर हो। 
०३. इस न्यूज़ डिबेट में पुरुष भी भाग ले रहे थे। इससे मुझे लगा कि औरते पुरुषो की सहायता चाह भी रही है जिससे की उनके ऊपर से क्राइम दूर हो। 
०४. मैंने अपने घर में ही माँ और बहनों के नेचर को देखा था। मुझे मालूम था कि इन औरतो भला करना अपने को बहुत बड़े आफत में डालना है। और ये औरते महत्व देंगी भी नहीं। इसलिए भविष्य में अपने ऊपर होने वाले सारे मुसीबतों को सोच कर अपना सर ओखली में डाला था। मैंने अपना नाम hutia Ram इसलिए रखा था (इसमे C एब्सेंट है)। मेरे प्रोफाइल में अबाउट डायलॉग में मैंने साफ साफ लिखा है कि मेरे भाग्य में है इलेक्ट्रिक शॉक वगैरा वगैरा। वह सब दुर्गति होगी मेरे लाइफ में जिसका मैंने कल्पना नहीं किया होगा। आज मरने से पहले देख भी लिया कि ४९% औरते भी मेरे माँ बहनों जैसी होती हैं। 
०५. औरतो के ऊपर क्राइम जो हो रहा था। यह आकस्मिक घटना नहीं था। इसलिए मैंने तुरंत नहीं किया। (और तुरंत हो भी नहीं सकता था; जब तक की न तुम सवा बिल्लिओन्स मेरे बात सुनने के लिए तैयार न होते।) बल्कि मैंने प्रस्ताव रखा। जिससे कि मैं निश्चिन्त हो लूँ कि औरते अपने ऊपर से क्राइम दूर होने के लिए मेरी सहायता चाहती हैं। 
०६. प्रस्ताव एक बार में पुरे शब्दों में नहीं रख सकता था। इसलिए मैं शीर्षक रखा। और शीर्षक को समझाने के हमेशा तैयार और चौकन्ना था। एक लड़की आकांशा प्रसाद मेरे शीर्षक को गलत तरीके से समझ कर मुझे बहुत बुरा भला सुनाई। लेकिन वह शीर्षक का मतलब समझाना ही नहीं चाहती थी। अपना ही सुनाये जाती थी। और बोलती थी कि वह रोड छाप इडियट की भी सुनने के लिए तैयार है। 
०७. मैं तीन साल कर प्रस्ताव रखता रहा। कोई औरत मुझे यह नहीं टोका कि तुम अपने काम से काम रखो; हमें तुम्हारी सहायता नहीं चाहिए। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि औरते मेरी सहायता नहीं चाहती थी। 
०८. (जारी)
०९. मैंने जो भी प्रस्ताव रखा। ऐसे जगह पर रखा जहाँ लोग औरतो के अगेंस्ट क्राइम दूर करने के लिए विचार कर रहे थे। जैसे कि औरतो के अगेंस्ट क्राइम दूर करने के लिए न्यूज़ डिबेट, क्राइम शो जैसे की क्राइम पट्रोल, सावधान इंडिया, शैतान ए क्रिमिनल माइंड टीवी सीरियल वगैरा वगैरा। इसके अलावा मित्रो वगैरा से। 
१०. मेरा प्रस्ताव तुम सवा बिल्लिओन्स के समझ में नहीं आता था। इसलिए मैं प्रस्ताव के तरीके जैसे कि शीर्षक वगैरा बदला करता था। कुछ उदाहरण नीचे हैं और उससे जुड़े ब्लॉग भी हैं - 

(मुझे मालूम है कि मीडिया के लोग अपने पब्लिश किये गए विडियो के नीचे विजिटर के सारे कमेंट को पढ़ते हैं; और उन्होंने मेरे कमेंट को पढ़ा भी था। यह मुझे कैसे मालूम है? मेरे लिए तुम सवा बिल्लिओन्स को यह समझा पाना मुश्किल है।)

"शरद केलकर! बस एक सेमिनार का आयोजन करो। जिसमे सारे लोगो के प्रश्नों का उत्तर दूँगा। मै सभी के सोच बदल दूँगा। मै पाच साल से अपने किराये के मकान में बंद होकर सड़ रहा हू। मेरे जीने का कोई सेंस नहीं है। बस मै ये चाहता हू। मरने से पहले सारे के सारे अपराधो की पहेली सुलझा दूँगा। शरद केलकर! अंत में तुमने एक प्रश्न पूछा है। मै तुम्हारे सारे प्रश्नों का उत्तर दूँगा। और इन अपराधो को भी खत्म कर दूँगा।"
चैनल: कलर्स टीवी; धारावाहिक: शैतान एक क्रिमिनल माइंड; अभिनेता: शरद केलकर; प्रकाशित दिनांक: २०१३-०५-१९। 
(जारी)

"तुम लोग जो मर्जी वो कर लो। अश्लील वीडियो भी ब्लाक कर के देख लो। जब थक जाओ तो मेरे पास आ जाओ। नहीं तो लेट सबेर बुर्का मेथड हल बनेगा ही।"
चैनल: NDTV; समाचार प्रस्तोता: रवीश कुमार; प्रकाशित दिनांक: २०१३-०४-२८। 
(जारी)

"तुम लोगो के रोने से अपराध नहीं कम होगा। यहाँ तक यदि पुलिस १००% क्रिमिनल पकड़ती है। तब भी ये वलात्कार होगे। क्यों नहीं सोचते हो कि तब भी अपराध हुआ न? मै इस क्राइम दूर कर सकता हू। श्रेष्टता की भावना छोड़ो। एक सेमिनार रखो। इंडिया के टॉप १०० एक्सपर्ट को इकठ्ठा करो। मै साबित कर दूंगा की ३०% क्राइम इंडियन फिल्म इंडस्ट्री लेके आयी है। ४०% क्राइम इंडियन लॉ लेके आयी है।"
चैनल: इंडिया टीवी; समाचार प्रस्तोता: सौरव शर्मा; प्रकाशित दिनांक: २०१३-०५-०८। 
(जारी)

"अर्ज करता हू मेरी शायरी -
४०% अपराध भारतीय कानून लेके आयी है, ३०% कानून भारतीय सिनेमा उद्योग लेके आयी है।
मै ये दावा यूटूब पर किया करता हू, और लोग मुझे पागल समझा करते है।
या तो मै पागल हू, या ये सवा बिल्लिओंस पागल हैं।
अंत में, मै वही अर्ज करता हू, जहा पे ये अप्लाई होता है।"
चैनल: <अनगिनत>। 
(जारी)

"मैक्सवेल परेरा! आप सही हो। लेकिन ये सब जो श्रेष्ठता के भावना से ग्रस्त है। इससे काम नहीं चलेगा। मै बोल रहा हू कि ४०% क्राइम इंडियन लॉ लेके आई है। ३०% क्राइम इंडियन फिल्म इंडस्ट्री लेके आई है। ये सब लिगलियाये और फिल्मियाये होने के कारण बिलकुल ही विश्वास नहीं कर रहे होंगे। मै बोलता हू कि एक सेमिनार के आयोजन करो और इंडिया के टॉप १०० एक्सपर्ट्स को इकठ्ठा करो। मै ये साबित कर दूँगा और समस्या का समाधान भी कर दूँगा। जानता हू कि तुम सब ये कहोगे कि मै ही श्रेष्ठता के भावना से ग्रसित हू। लेकिन मेरे बिना कोई इस पहेली को सुलझा ही नहीं पायेगा।"
चैनल: NDTV; समाचार प्रस्तोता: रवीश कुमार; प्रकाशित दिनांक: २०१३-०४-२२। 
(जारी)

"या तो बुर्का सलूशन है या मैं सलूशन हूँ। मेरे सलूशन में बुर्का नहीं है। वन बिलियन राइजिंग सलूशन नहीं है।"
चैनल: <अनगिनत>। 
(जारी)

आकांशा प्रसाद से बात करने के बाद मैं औरतो को उनके जननांगी शब्दों से पुकारने लगा।
(जारी)

"कैसे समझाऊ तुम सब को कि अपराध गांडी डायनेस्टी में बढ़ा है। मेरी जिंदगी तो नर्क बन गयी है। यह बहुत ही चीप लगता है कि मैं यूटूब वगैरा सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर घंटो कमेंट किया करता हूँ और समझाने की कोशिश करता हूँ कि मैं ये सब क्राइम दूर कर सकता हूँ। इसमें कोई भी महिला विशेष मैंटेनस खर्च नहीं है। इसके लिए तुम सब इकठ्ठे हो जाओ। जहाँ मैं अपना सलूशन बक दूंगा। इसके लिए मैं फेल होने पर 'टार्चर टू डेथ' की शर्त स्वीकार करता हूँ। एक तुम सब हो कि इस श्रेष्ठता की भावना से ग्रसित हो कि अगर हम नहीं कर सकते तो यह चुतिया राम कैसे कर सकता है और मेरे कमेंट तो स्पैम घोषित कर देते हो। भले ही तुम सब क्राइम की झाट नहीं उखाड़ पाते हो।"
चैनल: सोनी; धारावाहिक: क्राइम पट्रोल; अभिनेता: श्री अनूप सोनी; प्रकाशित दिनांक: २०१५-०२-१५।

उसके बाद सवा बिल्लिओन्स के कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर और कुछ न बनने पर बैताल राज के रूप में मैं उल्टा पुल्टा नॉन सेंस कमेंट टाइप करता रहा और अप्रत्यक्ष रूप से hutia Ram के तरफ लोगो को पॉइंट करता रहा। मजेदार चीज यह है कि बैताल राज के प्रोफाइल पर मेरे नॉन सेंस कमेंट टाइप करने पर रिप्लाई के लम्बा थ्रेड चलता था। जब कि मेरे hutia Ram प्रोफाइल पर सही कमेंट टाइप करने पर लोग स्पैम घोषित करते थे। 

बैताल राज के प्रोफाइल प्रयोग कर के कमेंट:

"in dina wo pagala hutia comment nahi kar raha hai. mujhe koi bataye ke wah mar gaya kya? ya police use pagalkhana bhej diya? wo kahata hai ki ya wah solution hai ya burka."
(देवनागरी लिपि में)
"इन दिनों वह पागला हुतिया कमेंट नहीं कर रहा है। मुझे कोई बताये कि वह मर गया क्या? या पुलिस उसे पागलखाना भेज दिया? वो कहता है कि या तो वह सलूशन है या बुर्का।"
चैनल: सोनी; धारावाहिक: क्राइम पट्रोल; अभिनेता: श्री अनूप सोनी; प्रकाशित दिनांक: २०१५-०३-१५।

(जारी)

११. तीन साल कमाई रोक कर प्रस्ताव रखने पर पैसे ख़त्म होने पर मुझे महसूस हुआ कि ४९% औरते ही मेरे अगेंस्ट साजिस पर उतर आयी हैं। तो मैंने प्रस्ताव तुरंत रोक दिया। 
१२. और मैंने निश्चय किया कि मैं कभी भी उनको क्राइम दूर करने के लिए सलूशन नहीं दूँगा; चाहे औरते मेरे सलूशन को चाहने में इंटरेस्टेड क्यों न हो। 

हाँ, मेरा प्रस्ताव सच्चा था। क्योकि औरतो अगेंस्ट क्राइम को दूर करने के लिए मेरे सलूशन को पसंद न आने परे मैंने टार्चर टू डेथ का चैलेंज रखा था। अगर मैं कोई भी क्राइम किया होता तो इंडियन लॉ के अनुसार टार्चर टू डेथ नहीं मिल सकता है। इसलिए कोई यह नहीं कह सकता है कि मुझे सजा तो पहले ही मिल रहा था और उस सजा को सीधे तरीके से न लेकर औरतो के ऊपर झूठा उपकार जताया और सजा पाया। समस्या के हल देने के लिए मैं किसी से कोई भी पैसा नहीं डिमांड किया। 

मेरे प्रस्ताव के इतिहास:
मेरे hutia Ram की प्रोफाइल बनाने से पहले पिंकी नाम की कुक मेरे यहाँ अस्थाई रूप से खाना बनाने के लिए आयी। बातो के दौरान मैंने उसे बताया कि ये सब औरते के अगेंस्ट क्राइम हैं। मैं तो आसानी से हल कर दूँ। इतना पुलिस सुरक्षा, लॉ सिस्टम वगैरा की आवश्यकता नहीं है। वह बोली कि कोई नहीं कर सकता। उसके जाने के बाद मैंने कुछ सोच कर 
(जारी)

मैं अपने मित्र राजीव से बोला तो वह बोला कि तुम्हारे वस की बात नहीं हो। छोड़ो यह सब। कोई अच्छा सॉफ्टवेर तैयार करो। जिससे कि तुम पहचाने जाओ। 
(जारी)

मै अपने कुक से कहता था कि मैं औरतो के अगेंस्ट सारे क्राइम को दूर कर सकता हूँ। यहाँ तक कि तुम सब के साजिस के शुरुवात में मुझे लगा कि तुम सब मेरे हल को सुनने वाले हो। तो मैं अपने कुक से बोला कि अब ये लोग मुझे बुलायेगे। मैं हल दे दूँगा। उसके बाद मैं अपना प्रोविडेंट फंड तोड़ कर खर्चे के लिए रख लूँगा और अपना काम (कमाई) स्टार्ट कर दूँगा। लेकिन शीघ्र लगा कि तुम सब मेरे बात को सुनने के लिए विल्कुल ही नहीं इंटरेस्टेड हो। बल्कि मुझे तुम सब झूठे क्राइम में फ़साना चाहते हो। या तो मैं पागल हूँ या तुम सब पागल हो। अरे! तुम सब मेरा हल सुन लिए होते। पसंद आने पर भी तुम सब बोल देते कि तुम सब को नहीं पसंद आया। और तुम सब मुझे टार्चर टू डेथ दे देते। यह तुम सब के झूठे क्राइम के सजा से ज्यादे कड़ा सजा होता। एनी वे, यह अच्छा रहा कि तुम सब की साजिस मुझे समझ में आ गया और मैं प्रस्ताव रखना बंद कर दिया। 
(जारी)

मैं इन्टरनेट पर
(जारी)

"या तो बुर्का सलूशन है या मैं सलूशन हूँ। मेरे सलूशन में बुर्का नहीं है। वन बिलियन राइजिंग सलूशन नहीं है।"
यह शीर्षक कम से कम शब्दों में ज्यादे से ज्यादे टॉपिक को पॉइंट करता था। कोई भी मेरे कमेंट पर रिप्लाई नहीं करता था। एक लड़की आकांशा प्रसाद मेरे कमेंट को गलत मतलब निकालते हुए मुझे बोली कि तुम बुर्का पहनाना चाहते हो। तो मैंने क्लियर किया कि नहीं मैं नहीं बुर्का पहनाना चाहता हूँ। यह एक मुहावरा है। मैंने आकांशा प्रसाद को टार्चर टू डेथ का चैलेंज भी रखा। और उससे बातो के दौरान बहुत झाड़ भी सुना। मुहावरा द्वारा कम शब्दों में ज्यादे बात किया जा सकता है। मैं इस मुहावरे को समझाने के लिए हमेशा तैयार रहता था। आकांशा प्रसाद से बहुत सारे झाड़ सुनने के बाद मैं दुखित हो गया था। उसके बाद मैं औरतो को उनके जननांगी शब्दों से पुकारने लगा। इससे भी कोई मुझे टोके और मुझसे बात करे। यह बातो की गाड़ी में लिफ्ट लेने वाला हाल था। जैसे कि आमिर खान और पूजा भट्ट की मूवी में आमिर खान गाड़ी में लिफ्ट लेने ले लिए हर तरह की जेस्चर बना कर कोशिश किया और किसी गाड़ी में लिफ्ट नहीं मिला। लेकिन सवा बिल्लिओन्स में कोई भी ठीक से नहीं बात किया। तब मुझे लगा कि लोग मुझे पागल समझ रहे हैं। क्योकि मेरे बात असंभव सा दिख रहा है। 
(जारी)

बाद में मैंने बैताल राज के प्रोफाइल से बुर्का का मतलब क्लियर किया। जो की इस्लाम है; जिसमे औरत को बुर्का पहनना पड़ेगा और कुछ नियम हैं। जो कि तुम सवा बिल्लिओन्स आंशिक रूप से पालन करना स्टार्ट कर दिया है। जैसे कि ब्लात्कारी को मृत्युदंड दो, कामुक विडियो बैन करो वगैरा। 
(जारी)

अगर तुम सवा बिल्लिओंस मेरे ट्विटर चेक करोगे। तो तुम्हे साफ़ दिखेगा कि मैंने तीन साल औरतो के अगेंस्ट क्राइम के न्यूज़ विडियो और क्राइम दूर करने के जुड़े न्यूज़ डिबेट देखा है। परमात्मा जानते है कि मैंने तीन साल औरतो का मजाक बनाया या कि उनके अगेंस्ट क्राइम दूर करने के लिए प्रस्ताव रखा। जब तुम सवा बिल्लिओन्स साजिस कर के मेरी कमाई रोकवाए हो। जिस साजिस में औरते और आगे हैं। मेरा दिल इन औरतो पर से टूट चूका है। अब मैं परमात्मा से यही मनाता हूँ कि हे परमात्मा! यदि मैं सचमुच ही औरतो के भले के लिए तीन साल औरतो के अगेंस्ट क्राइम दूर करने के लिए प्रस्ताव रखा और अपना सारा पैसा ख़त्म किया; तो मेरे मरने के बाद हजारो साल तक प्रत्येक पुरुष को मालूम हो कि मैंने औरतो का भला किया तो मुझे क्या सजा मिला। और कोई भी पुरुष औरत का भला न चाहे। और भविष्य में जब कोई औरत रोये। तो उसे याद आये कि hutia Ram उनका भला करना चाहा और ये औरत उसके अगेंस्ट साजिस रचा। और बदले में हजारो साल तक प्रेत बन कर भटकू; अगर मेरा मतलब औरतो का मजाक बनाना था; तो मैं हजारो साल तक प्रेत बनकर तो भटकू, लेकिन इनका कोई मजाक न उड़ाए। ऐसे भी मुझे मेरा चैलेंज मायने रखता है। वह यह कि या तो इस्लाम सलूशन है या मैं सलूशन हूँ। अब इस्लाम सलूशन बने तो मेरा चैलेंज साबित हो जायेगा। 
(जारी)

अंग्रेजी संस्करण:
Help

अंत में, मैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कहूँगा कि पशु पक्षियों को मत खाओ; और उन्हें मत तंग करो। अगर गाय भैस वगैरा को पालो तो उन्हें मान दो; और उनके गले में मत रस्सी बाधो। नहीं तो अपने पतन की रफ़्तार तेज कर लिए। यह मेरे समूह विवाद सिद्धांत के आधार पर है; जो कि मैंने अपने रूम मे जिक्र किया था। 

(hutiaram.blogspot.in)

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