Friday, December 4, 2015

मेरे कमाई के इतिहास


रेगुलर जॉब के दौरान ०७ जनवरी २००८ को सिंगापुर के एक सॉफ्टवेर कंपनी मे मेरी अपॉइंटमेंट थी। मेरे पास $३५०० प्रति माह का ऑफर लैटर था। लेकिन मैं नहीं गया। मेरे न जाने के कई कारण थे। जैसे कि शादी की चिंता; वर्तमान कंपनी के HR टीम मुझसे नाराज हो गयी; वगैरा वगैरा। उसके बाद फरवरी २००८ में मैं अपने वर्तमान कंपनी के जॉब को छोड़ दिया। 

वर्तमान कंपनी के जॉब को छोड़ने के बाद मेरे पिछले कंपनी के मेरे अधीनस्थ सॉफ्टवेर इंजिनियर के मित्रो के सॉफ्टवेयर डेवेलोप करना था। उसके मित्रो ने एक सॉफ्टवेयर कंपनी खोला था। मैं कभी भी उनके सॉफ्टवेयर कंपनी देखने नहीं गया। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के दौरान उनके क्लाइंट ने सॉफ्टवेयर कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर दिया। फिर मैंने इन्टरनेट से सॉफ्टवेयर कॉन्ट्रैक्ट लेने को सोचा और एक डोमेन अपने होम टाउन के पोस्ट ऑफिस के नाम पर रजिस्टर कराया। और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट वेबसाइट लांच कर दिया। उसके बाद उस वेबसाइट को देख कर एडोब इंडिया के एक सॉफ्टवेयर इंजिनियर मेरे पास आया। मैं कभी यह नहीं देखने गया कि सचमुच वह अडोब इंडिया में काम करता है कि नहीं करता है। मुझे तो पैसे से मतलब था। उसके रिश्तेदार के सॉफ्टवेयर डेवेलोप करने थे। मैं बात कड़वा बोलता हूँ। बातो की कड़वाहट से प्रोजेक्ट मध्य में ही कैंसिल हो गया। मुझे वह ५००० रु का चेक दिया था। जिसे मैंने भजाया था; इन्टरनेट बैंकिंग के द्वारा वापस कर दिया। उसके बाद सॉफ्टवेयर डेवेलोप करने के लिए एक लड़की का ईमेल आया। मैंने उसका सॉफ्टवेयर डेवेलोप किया और ऑनलाइन पेपाल के द्वारा उसने मुझे पैसे पे किया। मैं कभी उस लड़की को देखने नहीं गया। मुझे तो हमेशा की तरह पैसे से मतलब था। जैसे की इबे पर सामान बेचा जाता है। उस लड़की के सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के दौरान मैंने अपना प्रोफाइल फ्रीलान्स वेबसाइट पर बनाया। वेबसाइट के बैक में मैं अपना सारा बैंक अकाउंट जोड़ा था। लेकिन फ्रंट पर मैं अपना नाम छुपाना चाहता था। क्योकि रेगुलर जॉब के दौरान कई लड़कियाँ में दुश्मन हो गयी थी। इसलिए मैंने अपना नाम बैताल राज रखा। चूँकि बैताल राज नाम मेरे बैंक अकाउंट डिटेल से नहीं मैच करता था। मैं अपना फोटो नहीं लगा सकता था। वही तो मैं चाहता था। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं था। मैंने इस प्रोफाइल पर कई कॉन्ट्रैक्ट पर काम किये और कई प्रोजेक्ट कम्पलीट किये। और २००९ से लेकर २०१२ तक $२० प्रति घंटा के दर से कमाता था। इस दौरान मुझे सुनाली अगरवाल (linkedin.com/in/sunaliaggarwal) नाम की लड़की का फुल टाइम जॉब का ऑफर आया और मुझे वह बुलायी। मैं उसके पास गया। उसके बाद वह लड़की मेरे साथ क्या जोक मचाया कैसे कहूँ! मेरे दुसरे ब्लॉग में डिटेल में लिखा है। जब समझ में आ गया कि यह साजिस था। उसके बाद मैं फिक्स्ड कॉन्ट्रैक्ट उठाना बंद कर दिया। यहाँ तक कॉन्ट्रैक्ट इनविटेशन को नेगलेक्ट करना स्टार्ट कर दिया। और अंत में उन लोगो ने बाइबिल नाम के प्रोजेक्ट में गॉड का नाम लेते हुए और प्लीज प्लीज बोलते हुए घंटे के कॉन्ट्रैक्ट में बकाया पैसे पर थोड़े थोड़े पैसे वेस्टर्न यूनियन से ट्रान्सफर करने करते हुए सॉफ्टवेयर कम्पलीट कराने पर मुझे चुना लगाया और साजिस के अंतरगत मेरे पीठ पीछे वह फ्रीलान्स प्रोफाइल से शिकायत किया कि मैंने बहुत सारे फ्रीलान्स प्रोफाइल बना रखे हैं। मैं ऐसा घाटे के काम क्यों करू? फ्रीलान्स वेबसाइट पर एक ही प्रोफाइल होने चाहिए। अगर एक से अधिक प्रोफाइल बना कर काम करते हैं तो प्रत्येक प्रोफाइल में काम कॉन्ट्रैक्ट दिखेगे और प्रोफाइल कम रेटेड दिखेगा। फिर भी फ्रीलान्स वेबसाइट मेरे प्रोफाइल को ब्लाक की। 

फिर मेरे पुराने क्लाइंट बचे; जिनसे मैं डायरेक्ट काम करता था; और पेपाल वगैरा के द्वारा पैसे लेता था। क्या भरोसा इन्ही क्लाइंट का मेरे फ्रीलान्स प्रोफाइल को ब्लाक करने में हाथ हो? उन्ही दौरान नवीन छक्कर नाम के क्लाइंट का भी काम किया। नवीन छक्कर बोले कि वे मेरे रेंटेड फ्लैट में पहली मंजिल पर अपना ऑफिस खोला है। मैं दुसरे मंजिल पर रहता हूँ। लेकिन मैं हमेशा की तरह कभी भी उनका ऑफिस देखने नहीं गया। मैंने हमेशा की तरह पैसे ऑनलाइन बैंक ट्रान्सफर के द्वारा लिया। फिर वह लड़की जिसका सॉफ्टवेयर डेवेलोप करता था मुझसे कॉन्ट्रैक्ट करना बंद कर दिया। 

उसके बाद पिछले साल मैंने अपने कुक के लड़के सुनयन चन्द्र (about.me/SunayanChandra) की पहचान पत्र का प्रयोग करते हुए अपने कुक के लड़के के तरफ से फ्रीलान्स वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाया और उसका बैंक डिटेल जोड़ा। फिर सॉफ्टवेयर कॉन्ट्रैक्ट के द्वारा अपने कुक के लड़के के कमाई का तीन चौथाई मैं लेता था। चूँकि किसी को मालूम यह नहीं था कि मैं इस प्रोफाइल पर काम करता हूँ; इसलिए मैं शुरू में सारा फिक्स्ड कॉन्ट्रैक्ट उठाता था। चूँकि पिछली बार मेरे प्रोफाइल को ब्लाक करने के द्वारा अपवर्क (ओडेस्क) ने मना कर रखा था। इसलिए मुझे डर लगता था कि अपवर्क (ओडेस्क) को कही मालूम न चल जाये कि यह प्रोफाइल मेरा है। ऐसे तो मैं अपवर्क पर जाना ही नहीं चाहता था। 

फिर मुझे मालूम चला है कि तुम सवा बिल्लिओन्स मेरे अगेंस्ट साजिस पर उतर आये हो। मैंने तुरंत फिक्स्ड कॉन्ट्रैक्ट लेना बंद कर दिया। उसके बाद मुझे मालूम चला कि अपवर्क (ओडेस्क) को भी मालूम हो चूका है। मुझे जल्दी $३ प्रति घंटा पर भी कॉन्ट्रैक्ट जल्दी नहीं मिल रहे है। जब कि मैं अपने क्लाइंट को कॉन्ट्रैक्ट के शुरुवात में चार घंटा फ्री टेस्ट घंटा देने को तैयार हूँ। फिर देखा कि मेरे क्लाइंट अर्धसत्य क्लाइंट हैं। फिर जॉब सक्सेस रेट जान बुझ कर मेरा डाउन किया जा रहा है। और मेरा खर्चा मेरे कमाई से ज्यादे है। तब मुझे समझ में आ गया कि मैं अब विल्कुल ही नहीं टिक सकता। मैंने काम रोक दिया है। क्योकि मैं झूठमुठ के कोशिश नहीं करने वाला इन्सान हूँ। और ब्लॉग के द्वारा अपने आप को जस्टिफाई करना स्टार्ट कर दिया कि मैंने किसी का नुकसान नहीं किया; जब सब मेरे दुश्मन हो गये। 

एक और बात है जो कि मैं शेयर करना चाहता हूँ। वह यह कि कॉलेज दिनों से ही मैं अपने कंप्यूटर पर अपने अलावा अपने मित्रो, अपने रिश्तेदारों, अपने सहपाठियों के यूजर बनाता हूँ। जॉब के दौरान इनके अलावा मैं अपने कंसीयज, अपने क्लाइंट के नाम यूजर बनाये। जैसे कि प्रदीप झा मेरे कंसीयज हैं (जिनसे मैं कभी कभार डिसेंट काम करवाए; यानि जो काम मैं बाहर जाकर करता। और उसके लिए मैंने उन्हें डिसेंट अमाउंट भी थमाए)। मैं प्रदीप झा के नाम उनके सामने यूजर बनाया। और जब भी वो आते। हम लोग उसी यूजर में काम करते। प्रदीप झा के आपत्ति न होने पर उनका फोटो भी कंप्यूटर के यूजर प्रोफाइल में यूज़ किया। दूसरा उदाहरण, जैसे कि नवीन छक्कर आये तो नवीन से पूछ कर नवीन के नाम अपने कंप्यूटर में यूजर बनाये। हाँ, बेशक उनका फोटो नहीं यूज़ किया। नवीन छक्कर के नाम मैंने उनसे पूछ कर जीमेल में अकाउंट भी खोल लिया। जिससे मुझे गूगल ड्राइव में १५ GB ऑनलाइन स्टोरेज मिले। हाँ, बेशक उनका फोटो नहीं यूज़ किया। क्योकि नाम का क्या? किसी का ओनरशिप थोड़े है? मैंने उनके एक से अधिक क्लाइंट के लिए काम किया। तो मैंने उनके यूजर के गूगल ड्राइव में उनके क्लाइंट वाइज सॉफ्टवेयर कोड रखा।

जब कोई मुझे अपना पासवर्ड देता है तो मैं उस पासवर्ड को संचित कर लेता हूँ। जैसे कि अगर मेरे क्लाइंट अपने डेवलपमेंट ईमेल के पासवर्ड दिए या मेरे मित्र जैसे कि अमित मिश्रा ने अपना पर्सनल ईमेल के पासवर्ड दिए, मैंने उन पासवर्ड को संचित कर लिया। 

सामान्यतः लोग एक ईमेल रखते है। लेकिन कंपनी में ऑफिसियल ईमेल भी होता है। जिसका प्रयोग कर के लोग ऑफिस में अपने सहकर्मी से कम्यूनिकेट करते है। लेकिन फ्रीलान्स वेबसाइट में तीसरा ईमेल डेवलपमेंट ईमेल होता है; जिसे क्लाइंट अपने कांट्रेक्टर को थमाते है; जो कि सामायतः जीमेल होता है। सॉफ्टवेर कांट्रेक्टर उस ईमेल का प्रयोग कर के उस क्लाइंट के गूगल वेब मास्टर, गूगल एनालिटिक्स वगैरा अकाउंट का एक्सेस करता है। क्लाइंट के डेवलपर ईमेल से उनका कोई बैंक अकाउंट नहीं जुड़ा होता है; और न ही उनके अपने मित्रो से कम्युनिकेशन। इसलिए क्लाइंट मुझे बिना चिंता के अपना डेवलपर ईमेल थमाते है। 

कभी कभार क्लाइंट मुझे अपने FTP एक्सेस के लिए पासवर्ड देते हैं। मैं फ़ास्ट एक्सेस के लिए क्लाइंट के FTP लोकेशन के कोड को अपने कंप्यूटर पर डाउनलोड कर लेता हूँ। अगर क्लाइंट मुझे अपना डेवलपर ईमेल देते है। क्लाइंट के डेवलपर ईमेल से जुड़े गूगल ड्राइव के कोड को फ़ास्ट एक्सेस के लिए अपने कंप्यूटर पर डाउनलोड कर लेता हूँ। लेकिन मैं कभी भी क्लाइंट के कोड को बेचता नहीं हूँ। 

कभी कभार क्लाइंट VPN भी यूज़ करवाते हैं। जब VPN यूज़ करते हैं तो क्लाइंट का IP एड्रेस मेरा IP हो जाता है। कभी उल्टा यानि मेरा IP एड्रेस क्लाइंट के IP एड्रेस हो जाता है। 

सामान्यतः जब क्लाइंट सॉफ्टवेर कांट्रेक्टर को अपना वेब होस्टिंग अकाउंट का एक्सेस थमाता है तो सॉफ्टवेर कांट्रेक्टर उस डोमेन पर अपना ईमेल बना लेते हैं। 

ऐसे तो मेरे पास दो वेबसाइट थे मेरे होम टाउन और मेरे होम टाउन के पोस्ट ऑफिस के नाम। मेरे क्लाइंट मुझे साझे में सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट के लिए वेबसाइट का बात किया। मैंने बोला कि मेरे पास पहले से ही दो डोमेन है। तो मेरी क्लाइंट नहीं मानी और उसके नाम तीसरा वेबसाइट खोलना पड़ा। बाद में वह मुझसे ही अपने वेबसाइट के रिन्यूअल को कहने लगी। क्योकि वेबसाइट के प्रोडक्ट तो पार्टनरशिप में बेचने थे। बाद में वह क्लाइंट मुझसे कांटेक्ट करना बंद कर दिया। इस आधार पर वह वेबसाइट तो मेरा हो गया। लेकिन हो के भी क्या? मेरे पास तो पहले से ही दो वेबसाइट हैं; जिनको मैं डेवेलोप ही नहीं किया हूँ। 

यह सब मैंने भी किया है। यह सब बात मैं इसलिए शेयर कर रहा हूँ कि मेरे मरने के बाद कोई मेरे क्लाइंट को मुझे ही न समझ बैठे। मैं इन्टरनेट पर चीटिंग कैसे कर सकता हूँ? गांडी डायनेस्टी सारे ऑनलाइन मनी ट्रान्सफर को रेगुलेट करती है। प्रत्येक मनी ट्रान्सफर अकाउंट के बैक में वेरिफिकेशन होता है। मैं तो हमेशा अपना बैंक अकाउंट यूज़ करता हूँ मनी ट्रान्सफर मीडिया पेपाल वगैरा को वेरीफाई करने के लिए। मेरे पास सारा सर्टिफिकेट राम के नाम से है। बैताल राज तो ऐसे ही नाम है जैसे कि कोई उपनाम नाम होता है। मेरे सहकर्मी जानते है कि मैंने अपना उपनाम नाम बैताल राज रखा। मैंने न्यूज़ पेपर में अपना ड्राइविंग पहचान पत्र और पासपोर्ट यूज़ करते हुए अपना नाम आलोक रखा। अफ़सोस कि मैं आलोक की व्यक्तित्व को नहीं अपना पाया और औरतो के अगेंस्ट क्राइम दूर करने के चुतियापे पर उतर आया और अपना नाम hutia Ram रखा। उसके बाद अपने गले में आफत की रस्सी बाँध लिया। 

अपने जीवन के तो अजीब हाल है। अपना घर ब्लाक, रिश्तेदार ब्लाक, कंपनी ब्लाक, बाहर जाना ब्लाक और फ्लैट के बाहर लॉक। और अब इन्टरनेट पर कमाई ब्लाक। और तो और शादी भी ब्लॉक। मैंने अपने दूसरे पोस्टो में डिटेल में लिखा है। 
(जारी)

अंग्रेजी संस्करण:
History of My Earning

अंत में, मैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कहूँगा कि पशु पक्षियों को मत खाओ; और उन्हें मत तंग करो। अगर गाय भैस वगैरा को पालो तो उन्हें मान दो; और उनके गले में मत रस्सी बाधो। नहीं तो अपने पतन की रफ़्तार तेज कर लिए। यह मेरे समूह विवाद सिद्धांत के आधार पर है; जो कि मैंने अपने रूम मे जिक्र किया था। 

(hutiaram.blogspot.in)

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