मैंने बोला कि था कि ४०% क्राइम इंडियन लॉ लेकर आयी है। और ३०% क्राइम इंडियन फिल्म इंडस्ट्री लेकर आयी है। लेकिन जब जरुरत पड़ा तो मैंने इंडियन फिल्म इंडस्ट्री का भी भला चाहा। जैसे कि जब सेंसर बोर्ड के द्वारा 'मोहल्ला ८०' (Mohalla Assi) फिल्म बैन किया गया था। और मुझे मालूम चला था कि तुम सवा बिल्लिओन्स मुझे मॉनिटर कर रहे हो। और मुझे तुम सब ने ऐसा दिखाने की कोशिश किया कि तुम सब औरतो के अगेंस्ट क्राइम दूर करने के मेरे प्रस्ताव स्वीकार कर लिए हो। मैं अचम्भित होता था कि तुम सब डायरेक्ट मुझसे क्यों नहीं बात कर रहे हो। तो मैं सोचता था कि शायद तुम सब कुछ एक्सपेरिमेंट कर रहे होंगे। ऐसे भी मैं तीन साल से चाहता था कि तुम सवा बिल्लिओन्स मेरे बात को सुनो। तो बात कहने की ऐसा सुनहरा मौका कहा गवाता? तब मैंने अपने रूम में तुम सवा बिल्लिओन्स को बताया कि मैं कोई भी फिल्म बैन के पक्ष में नहीं हूँ। हाँ, किसी फिल्म में कुछ सीन होते हैं, जो कि आपत्ति जनक होते हैं। जिन पर घंटो न्यूज़ चैनल पर उस फिल्म के बैन होने के लिए डिबेट चलता है। मैंने एक इंटरमीडिएट उपाय बताया। जिसमे फिल्म भी बैन नहीं होगी और दोनों पक्ष यानि फिल्म निर्माता और बैन कराने वाले पक्ष खुश हो जाते। वह अच्छा नहीं तो बेकार तरीका भी नहीं था। शायद मेरे मरने के बाद तुम सब उस तरीके का पालन करो। चूँकि तुम सब वह तरीका जान ही चुके हो। तो क्यों न यहाँ पर फिर से उस तरीके का जिक्र कर दूँ। जिससे भविष्य में मुझे इसकी क्रेडिबिलिटी मिल जाए। ऐसे तो मैंने अपने रूम में बहुत कुछ बोला है। जिसे तुम सब चुपके से रिकॉर्ड किये हो। फिर भी मैं उन बाकी चीजो को छोड़ कर केवल इस तरीके के यहाँ बताना चाहूँगा। (जारी) नियम: (जारी) कारण: फिल्मे समाज को प्रभावित करती हैं। कभी कभी फिल्मे सही चीज को गलत दर्शाती है और गलत चीज को सही। और लोग ब्रेनवाश्ड होकर सही को गलत और गलत को सही समझ लेते भी हैं। इसके कई कारण हैं। एक कारण यह भी है कि फिल्मे ज्यादे लोग के पहुच में होती है। जब कि एक अकेला जो कि सही बोल रहा हो, उसका बात बहुत ही कम लोगो के पास पहुचता है। इसलिए कम से कम एक अकेले (जो कि सही बोल रहा है) की बात उतने लोगो के पास पहुचनी चाहिए जितना फिल्मे पहुचती है। (जारी) बाद में यही इंडियन फिल्म इंडस्ट्री वाले मेरे अगेंस्ट साजिस रचा। फिल्म इंडस्ट्री वालो को पहले ज़माने में भांड बोला जाता था। भांड और रांड में ज्यादा फर्क नहीं होता है। भांड अपना नाम बदल कर सेलिब्रिटी वगैरा कुछ भी क्यों न रख ले; भांड तो भांड ही रहेंगे। इसलिए मैं उनसे क्या आशा कर भी सकता हूँ? मुझे तो दुःख उन ४९% औरतो से है जिनके भले के लिए टार्चर टु डेथ स्वीकार किया था। भला तो मैं गांडी डायनेस्टी का भी चाहा। (कैसे? अब मैं नहीं बताऊँगा। क्यों कि अब मैं इसका भला नहीं चाहता हूँ।) लेकिन यह डायनेस्टी मेरे अगेंस्ट साजिस रची। इससे आशा भी क्या किया जा सकता है? क्यों कि यह डायनेस्टी एक पाखंडी गांडी की है। जो कि अपने ही विचारो पर सही नहीं उतरा। वो बोलता था कि अगर तुम्हे कोई थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल भी आगे कर दो। जब उसे नाथूराम ने गोली मारा तो गांडी के हेंचमेनो ने नाथूराम से जुड़े लोगो पर बहुत ही अन्याय किया और नाथूराम को फासी भी देकर गांडी के विचार को गलत साबित कर भी दिया। गांडी का दूसरा विचार था कि अन्याय सहने वाला पापी होता है। मेरे अगेंस्ट यह डायनेस्टी साजिस रची है। और इस प्रकार मेरे ऊपर अन्याय की है। यह डायनेस्टी सवा बिल्लिओन्स को मेरे बात को सुनने के लिए मना कर दी है। वास्तव में सवा बिल्लिओन्स भी इस साजिस में इसके साथ हैं। मैंने संसार के न्यूज़ एजेंसी को कांटेक्ट करने की कोशिश किया। इसने अपने राजनीतिक और इकनोमिक पॉवर से संसार के न्यूज़ एजेंसी को भी अपने से मिला ली है। संसार के न्यूज़ एजेंसी भी मेरे बात नहीं सुन रहे हैं। और मैं कुछ नहीं कर पा रहा हूँ। इस आधार पर गांडी के अनुसार मैं पापी हुआ। मेरे मरने के बाद मेरे दादा का वंश भी ख़त्म हो जायेगा। मेरा दिल टूट चुका है। अकेले का परमात्मा होते हैं। मुझे तो बस परमात्मा पर विश्वास है। जो कि मेरे मरने के बाद फैसला करेंगे। ऐसे मैंने श्राप केवल औरतो को ही दिया। इस गांडी डायनेस्टी से क्यों आशा रखूँ? क्यों कि यह डायनेस्टी एक पाखंडी गांडी की है। और मैं इंडियन फिल्म इंडस्ट्री वालो से क्यों आशा रखूँ? क्यों कि भांड और रांड में ज्यादा फर्क नहीं होता है। तो मैं पाखंडी और भांड के आशा ही क्यों आशा रखूँ? अंग्रेजी संस्करण: I wished Everyone Well अंत में, मैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कहूँगा कि पशु पक्षियों को मत खाओ; और उन्हें मत तंग करो। अगर गाय भैस वगैरा को पालो तो उन्हें मान दो; और उनके गले में मत रस्सी बाधो। नहीं तो अपने पतन की रफ़्तार तेज कर लिए। यह मेरे समूह विवाद सिद्धांत के आधार पर है; जो कि मैंने अपने रूम मे जिक्र किया था। (hutiaram.blogspot.in)
Saturday, December 12, 2015
मैंने सबका भला चाहा।
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