Sunday, December 13, 2015

लूज़र कौन है?


मैंने तीन साल औरतो के अगेंस्ट क्राइम दूर करने के लिए प्रस्ताव रखा। यहाँ तक मैंने सलूशन पसंद न आने पर टार्चर टू डेथ का चैलेंज किया। लोगो ने औरतो के कान भरा कि मैं भद्दी बात करता हूँ; अगर कुछ और अक्षर जोड़े तो मेरा नाम ही भद्दा है; मैं बकवास कर रहा हूँ; मैं सेमिनार में औरतो की शिकायत ही करूँगा; मैं पैसे कमाने के लिए यह सब कर रहा हूँ। औरते उनके चक्कर में आ गयी। कोई नहीं सुना। एक लड़की आकांशा प्रसाद सुनी। और वो भी मुझे डाटते ही रही। और वह बहुत सारे संस्थाओ के चक्कर लगा कर थक हार कर सेमिनार भी नहीं करा पायी। उसे तो सेमिनार का मतलब ही नहीं मालूम था। वह मीटिंग को सेमिनार समझी। 

मेरा नाम भद्दा कहाँ है? क्यों तुम सब मेरे नाम में कुछ और अक्षर जोड़ोगे? जब हम दुसरो के नाम में ऐसे ही कुछ और अक्षर जोड़ते रहे; तो उनके नाम का मतलब ही कुछ और निकलेगा। 

अरे! तुम सवा बिल्लिओन्स को सुनना ही था। ठीक उसी तरह जिस तरह से तुम सब चुपके से मेरे रूम में कान लगा कर सुनते हो। अब तुम सब झूठ बोलोगे कि हम नहीं सुनते हैं तो मैं क्या कर सकता हूँ? मैं तो इन्टरनेट पर पोर्नोग्राफिक विडियो भी देखता हूँ। क्या वह आवाज तुम लोगो को नहीं सुनाई पड़ती है? मैं सेमिनार में पोर्नोग्राफिक विडियो तो नहीं चलाता। अब बताओ कि औरतो के अगेंस्ट क्राइम दूर करने के लिए मेरा सलूशन पाने के लिए सामने सुनना बेहतर था कि मेरे अगेंस्ट साजिस रचने के लिए चुपके से मेरे रूम में कान लगा कर सुनना और मेरे चलते हुए पोर्नोग्राफिक विडियो की आवाज को भी सुनना? और ऐसे भी अगर तुम लोगो को मेरे भद्दे बोलने पर इशू था। तो तुम सब सेमिनार में एमटीवी रोडीस वगैरा शो के प्रवेश परीक्षा में भाग लेने वालो को रख देते। उन शो में वे सब गालियाँ सुनते हैं। मेरे सेमिनार मुझे वो गालियाँ भी सुना सकते थे। मुझे भद्दा बोलना पड़ता। क्योकि मुझे सामाजिक स्तर पर बोलना था। 

मैंने टार्चर टू डेथ का चैलेंज रखा था। फिर भी तुम सब का सोचना है कि मैं बकवास कर रहा था। तो यह तुम सवा बिल्लिओन्स के पागलपन का लक्षण है। इसलिए तो मैं कहता हूँ कि या मैं पागल हूँ या तुम सवा बिल्लिओन्स। 

अगर मुझे पैसा ही कमाना होता। मैं उसके लिए प्रचार में (जैसे कि न्यूज़ मीडिया में अपना चैलेंज पब्लिश करवाने) वगैरा में पैसे खर्च करता। लेकिन मैं प्रस्ताव रखने में कहाँ पैसा खर्च किया (सिवाय तीन साल बिना कमाए गुजारने में)? 

औरतो को लगा कि मैं सेमिनार में उनका शिकायत करूँगा। अगर शिकायत ही करना होता; तो सेमिनार कि क्या जरुरत थी? ऐसे ही मैं ब्लॉग लिख कर उनका शिकायत कर देता। जैसे कि औरतो के मेरे अगेंस्ट साजिस करने पर इन दिनों ब्लॉग लिख कर बताया कि औरत क्या होती है; जिनका भला करने पर चुपके से पीठ में छूरा घोपती है। मुझे सेमिनार (यानि एक भीड़) की आवश्यकता इसलिए थी। क्योकि क्राइम की समस्या ही चक्रव्यूह की तरह उलझी है। एक लेयर का जिक्र करता। तुम लोगो के क्रॉस प्रश्न का जबाब देता; और कुछ चीजे राजी कराता। फिर मैं अगले लेयर पर आता। इस तरह मैं क्राइम की समस्या के चक्रव्यूह को तोड़ता। सीधे बात करने के कोई नहीं तैयार होता। और अंत में तुम सवा बिल्लिओन्स में प्रत्येक खुश हो जाते। जब इस्लाम सलूशन बनेगा तो कोई नियम को समझायेगा नहीं, बल्कि नियम को बतायेगा। नियम को मानो तो मानो; नहीं तो बुर्का पहना कर पछाड़ पर डंडा। सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि इस्लाम में औरतो को सम्मान तो मिलेगा। लेकिन बराबरी का दर्जा नहीं मिलेगा। और परदा के लिए बुर्का भी पहनना पड़ेगा। 

तुम सवा बिल्लिओन्स को सुनना ही तो था। सलूशन पसंद न आने पर टार्चर टू डेथ के खतरा तो मुझे झेलना था। औरतो के अगेंस्ट क्राइम दूर करने के लिए इससे बेहतर डील तुम सवा बिल्लिओन्स के लिए क्या हो सकता है? तो यह बताओ कि लूज़र कौन है? जहाँ तक मेरा सवाल है तो तुम सब के मेरे अगेंस्ट मौत के साजिस के बाद मेरे दादा का वंश ख़त्म हो जायेगा। मैं तो ऐसे ही लूज़र दिख रहा हूँ। तुम मुझे लूज़र बोलो तो मुझे कहाँ बुरा लगेगा?

एनी वे, जो भी हो। अब मेरा दिल इन औरतो से फट चूका है। अब मैं औरतो के अगेंस्ट क्राइम दूर करने के लिए कोई सलूशन नहीं देने वाला; चाहे तुम लोग इंटरेस्टेड ही क्यों न हो। ऐसे भी तुम सवा बिल्लिओन्स नहीं इंटरेस्टेड हो। 

मेरा चैलेंज ऐसे भी सही साबित होगा। मैंने बोला था कि या तो मैं सलूशन हूँ या इस्लाम सलूशन है। मेरे मरने के बाद क्राइम बढेगा। अंत में तुम सब को इस्लामिक लॉ का ही पालन करना पड़ेगा। तुम सब में हिन्दू चुपके से इस्लामिक लॉ एक एक कर इंडियन लॉ के लगाओगे। फिर भी सब में हिन्दू इस्लाम की शिकायत करेंगे। ऐसे भी मैं न कोई नया धर्म नहीं ला रहा था; और न किसी का धर्म बदल रहा था।

अंग्रेजी संस्करण:
Who is Loser?

अंत में, मैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कहूँगा कि पशु पक्षियों को मत खाओ; और उन्हें मत तंग करो। अगर गाय भैस वगैरा को पालो तो उन्हें मान दो; और उनके गले में मत रस्सी बाधो। नहीं तो अपने पतन की रफ़्तार तेज कर लिए। यह मेरे समूह विवाद सिद्धांत के आधार पर है; जो कि मैंने अपने रूम मे जिक्र किया था। 

(hutiaram.blogspot.in)

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