Wednesday, July 17, 2013

Personal Message with Aakansha Prasad


जब मैंने यूटूब विडियो पर यह टाइप किया, "Either Burqa OR I'm the solution. No Burqa in my solution."। जिसका हिंदी रूपांतरण है, "या तो मैं सलूशन हूँ या बुर्का सलूशन है। और मेरे सलूशन में बुर्का नहीं सलूशन है"। आकांशा प्रसाद मुझपर भड़क गयी। मैंने बोला कि मैं बुर्का नहीं पहना रहा हूँ। मैंने बताया कि यह मुहावरा है। कम शब्दों में तो मुहावरा ही लिखा जा सकता है। मैं इसका पूरा मतलब बताने के लिए तैयार हूँ। एक सेमिनार कराओ। जिसमे मैं इसका पूरा मतलब बता दूँगा। और औरतो के ऊपर से सारे क्राइम दूर कर दूँगा। अगर औरतो के ऊपर के समस्या का मेरा हल को नहीं पसंद आये तो मैं टार्चर टू डेथ पसंद करूँगा।
(जारी)

आकांशा प्रसाद ने मुझसे बोला था कि तुम एक सेमिनार तक नहीं व्यवस्था कर सकते हो। जिसका उत्तर मैं आज दे रहा हूँ। 
हाँ, मैं एक सेमिनार की नहीं व्यवस्था कर सकता हूँ। लेकिन इसका मतलब नहीं कि मेरा चैलेंज झूठा था। लोग अपने जीवन में बहुत कुछ कर पाते हैं और बहुत कुछ नहीं भी कर पाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति की अपना किसी विशेष क्षेत्र में कुशलता होती है। मुझे सेमिनार आयोजन करने में नहीं है। 
(जारी)

आकांशा प्रसाद काफी झक मारने के बाद (हो सकता है कि आकांशा प्रसाद भारतीय महिला आयोग वगैरा गयी हो), सेमिनार की व्यवस्था अपने दिए समय सीमा पर नहीं करा पायी। उल्टे में वह सेमिनार का मतलब बताया कि लोगो की बात सुना जाता है और अपना भी विचार दिया जाता है। जहाँ तक मैं समझता हूँ कि यह सेमिनार नहीं बल्कि मीटिंग होता है। मैंने आकांशा प्रसाद से सेमिनार का बात किया था। मेरा सेमिनार से मतलब था कि तुम सब में से कुछ इकठ्ठे हो जाओ। जहाँ मैं औरतो के ऊपर अपराध के समस्या के हल बक दूंगा। और न समझ में आने पर मुझसे क्रॉस सवाल कर लेना। जहाँ तक मैं समझता हूँ की सेमिनार इनफॉर्मल रूप से एक क्लास रूम जैसा होता है। क्लास में टीचर होता है। जब कि सेमिनार में एक व्यक्ति किसी टॉपिक पर डिटेल रूप से अपना बात रखता है। क्लास में स्टूडेंट होते हैं। जब कि सेमिनार में लोग होते है। जिनका पोजीशन सेमिनार में टॉपिक पर बकने वाले के बराबर होता है। यानि की कोई छोटा और कोई बड़ा नहीं होता है। जब कि क्लास में टीचर बड़ा होता है और स्टूडेंट छोटे होते है। क्लास डेली होता है। जब कि सेमिनार आवश्यकता के अनुसार कभी कभार होता है। 
सेमिनार और मीटिंग में फर्क है। मीटिंग में एक से अधिक लोग अपनी बातो के रखते है। जितने भी सुनने वाले है; उनमे से सब अपने बातो को रख सकते हैं। आकांशा प्रसाद ने मेरे सेमिनार का मतलब मीटिंग से लिया था। नहीं विश्वास हो तो वह अपने ईमेल चेक कर ले। मेरे पास तो सारे ईमेल है। 
(जारी)

बातो बातो में यूटूब पर आकांशा प्रसाद बोली कि वह बहुत सारी औरतो के समस्या का समाधान दी है। मैंने उससे जीमेल में पूछा कि तुम बोल रही हो कि तुमने बहुत सारे औरतो के समस्या का समाधान दी हो। उन बहुत सारी औरतो में किसी एक औरत में बारे में बताओ कि उसे क्या प्रॉब्लम था और तुमने क्या समाधान दिया। वह बोली कि मैं ईमेल पर नहीं लिख सकती। मैंने बोला कि कोई बात नहीं। जैसा की तुमने शुरू में मुझसे मोबाइल नंबर माँगा था। इसलिए मोबाइल पर बोल दो। वह नहीं तैयार हुई। वह बोली कि मुझे उसके पास जाना होगा जहाँ वह काम करती है। मैंने बोला कि कोई बात नहीं। तुम अपने ऑफिस का एड्रेस दे दो। वह बोली कि इन्टरनेट पर सर्च कर लो। मैं इन्टरनेट पर क्या सर्च करता? मुझे तो यह भी नहीं मालूम था कि वह काम कहाँ करती है। एनी वे, वह अपने ऑफिस यानि किसी विदेशी NGO का एड्रेस दिया। मैंने बोला कि यहाँ पर कांटेक्ट व्यक्ति कौन है? उसने बोला कि कोई नहीं है। फिर वहाँ जाकर किससे पूछता कि आकांशा प्रसाद ने जो बहुत सारी औरतो की हेल्प की है। उन औरतो में कोई एक औरत के बारे में बता दो कि क्या प्रॉब्लम था और आकांशा प्रसाद ने क्या हल दिया? यह भी एक जोक था। 
(जारी)


(Continue...)



Monday, May 20, 2013

Shaitaan - A Criminal Mind - 19th May 2013 - Full Episode HD)



अर्ज करता हू मेरी शायरी -
४०% अपराध भारतीय कानून लेके आयी है, ३०% कानून भारतीय सिनेमा उद्योग लेके आयी है।
मै ये दावा यूटूब पर किया करता हू, और लोग मुझे पागल समझा करते है।
या तो मै पागल हू, या ये सवा बिल्लिओंस पागल हैं।
अंत में, मै वही अर्ज करता हू, जहा पे ये अप्लाई होता है। 

बस एक सेमिनार का आयोजन करो। मै सभी के सोच बदल दूँगा। मै पाच साल से अपने किराये के मकान में बंद होकर सड़ रहा हू। मेरे जीने का कोई सेंस नहीं है। बस मै ये चाहता हू। मरने से पहले सारे के सारे अपराधो की पहेली सुलझा दूँगा। शरद केलकर! अंत में तुमने एक प्रश्न पूछा है। मै तुम्हारे सारे प्रश्नों का उत्तर दूँगा। बस एक सेमिनार का आयोजन करो। जिसमे सारे लोगो के प्रश्नों का उत्तर दूँगा। और इन अपराधो को भी खत्म कर दूँगा। 

कर भला, हो बुरा

Wednesday, May 15, 2013

Karnataka C.M Siddaramaiah Now killer of cows (गायों का हत्यारा सिद्दरमैया)- Sudarshan News Vishesh



[hutia Ram] यहाँ पर यूटूब पे कमेंट लिखते लिखते थक गया हू कि ४०% अपराध भारतीय कानून लेके आयी है। ३०% अपराध भारतीय सिनेमा उद्योग लेके आयी है। फिर भी तुम सब श्रेष्ठता की भावना से इतने पीड़ित हो कि मुझे पागल समझते हो और इस दावा पर विश्वास नहीं करते हो।

[hutia Ram] ऐसे मेरी मौत कभी भी हो सकती है। लेकिन मेरे आगे पीछे रोने वाला कोई नहीं है। इसलिए कोई मुझे मारकर मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। मै जिन्दा रहू या मरू। मुझपर ही मेरे दादा का वंश खत्म होने वाला है। लेकिन मै चाहता हू कि मरने से पहले इस अपराध की पहेली को सुलझा दू। अन्यथा तुम सवा बिल्लिओन्स इस अपराध की पहेली को नहीं सुलझा पाओगे और पुलिस को दोषी ठहराते रहोगे।

कर भला, हो बुरा

Sunday, May 12, 2013

Bindas Bol- Kya VandeMatraram Ka Virodh Deshdroh Nahi Hai? (10May2013) SudarshanNewsTV



Audience Comments:
[mustafa786mm46] are sudarsan islam ka dusman sabse piyara hamara majhab h uske bad hamara desh

[hutia Ram] ऐसे तो मै हिन्दू हू। लेकिन मै तुमलोगों की भावनाओ का सम्मान करता हू। जो हिन्दू अपने धर्म का सम्मान नहीं करते। वे क्या तुमलोगों की घर्म की सम्मान करेंगे? ये तो देवताओ को छोड़ मनुष्यों को पूजते हैं। ऐसे राष्ट्रीय गीत एकेश्वरवाद के नियम को नहीं तोड़ता है। क्योकि राष्ट्रीय गीत कोई पूजा नहीं है। हिंदुत्व में भारत माँ ऐसी कोई देवी नहीं होती है। धरती माँ होती है। मै एक हिन्दू हू। और ये बात स्पष्ट कर रहा हू। इस आधार पर मुसलमानों को को भी राष्ट्रीय गीत गाना चाहिए।

[Adarsh Santuka] abe bhadwe desh pehle aata hai majhab nahi
in reply to mustafa786mm46 (Show the comment)

[hutia Ram] हिन्दू न केवल लिगलियाये और फिल्मियाये है, बल्कि देशलियाये भी है। ऐसे मुसलमानों को भी राष्ट्रीय गीत गाना चाहिए। क्योकि राष्ट्रीय गीत एकेश्वरवाद के नियम को नहीं तोड़ता है।

कर भला, हो बुरा

Thursday, May 9, 2013

India TV speak with 5yrs old Delhi rape victim's family



ये बिलकुल ही नेचुरल है। जब ये भाई साहब की बच्ची के साथ जो हैवानियत हुआ। उससे ये भाई साहब विफर पड़े। और अपने जानने पहचने वालो के सामने रो दिया। वे लोग बच्ची पर हुई हैवानियत से उत्तजित होकर बात फैला दी और मीडिया तक पहुच गयी। उससे बाद जो बवाल हुआ, पूरा देश जानता है। इससे कांग्रेस के वोट पर बहुत असर होगा। चूँकि ये वोट पर असर ये भाई साहब के बेटी के कारण हुआ। कांग्रेस मीडिया को खबर के जिम्मेदार ये भाई साहब को मानती है। और बदले में कांग्रेस कुछ न मदद कर के इन्हें सजा देना चाहती है। तुम कांग्रेस को इसके जिम्मेदार मानोगे। फैक्ट ये है की सत्ता में आने पर विपक्षी पार्टी भाजपा भी यही करेगी। और तो और ये आम पार्टी वाले भी यही करेंगे।

तुम लोगो के रोने से अपराध नहीं कम होगा। यहाँ तक यदि पुलिस १००% क्रिमिनल पकड़ती है। तब भी ये वलात्कार होगे। क्यों नहीं सोचते हो कि तब भी अपराध हुआ न?

मै इस क्राइम दूर कर सकता हू। श्रेष्टता की भावना छोड़ो। एक सेमिनार रखो। इंडिया के टॉप १०० एक्सपर्ट को इकठ्ठा करो। मै साबित कर दूंगा की ३०% क्राइम इंडियन फिल्म इंडस्ट्री लेके आयी है। ४०% क्राइम इंडियन लॉ लेके आयी है।

कर भला, हो बुरा

Shaitaan - A Criminal Mind - 5th May 2013 - Full Episode (HD)

Shaitaan - A Criminal Mind - 5th May 2013 - Full Episode (HD)

शरद केलकर: जिस देश की परंपरा और संस्कृति नारी को देवी की दर्जा देती है। उस देश में हर साल तक़रीबन एक लाख बच्चे लापता हो जाते है। और इनमे से मुख्य रूप से लड़किया वैश्यावृति में धकेल दी जाती है। जिला मन्सोर मध्यप्रदेश की ऐसी बस्ती जहा खुद उसके अन्दर पल रही लड़किया बिधिवन देह व्यापार में उतार दी जाती है। जहा कई माये गुप्तरूप से अपनी बेटियों को पैदा होते ही मौत की नीद सुला देती है इसके पहले की घर की पुरुस उन्हें बेच आये। इस पुरुस प्रधान समाज में धर्म और परंपरा के नाम पर कब होगा अंत नारी के शोषण का?
चुतिया राम: मै इस क्राइम दूर कर सकता हू। श्रेष्टता की भावना छोड़ो। एक सेमिनार रखो। इंडिया के टॉप १०० एक्सपर्ट को इकठ्ठा करो। मै साबित कर दूंगा की ३०% क्राइम इंडियन फिल्म इंडस्ट्री लेके आयी है। ४०% क्राइम इंडियन लॉ लेके आयी है। नौटंकी बंद कर दो धर्म को बदनाम करने की।

कर भला, हो बुरा

Tuesday, May 7, 2013

Who is to take responsibility for gender crimes: Society, police or the lawmakers?



मैक्सवेल परेरा: पब्लिक को हवा देकर भटकाने वाली बात अलग है। आप ठीक तरीके से सोच कर समझ लीजिये। what are you trying to do? आपने लॉ बनाया १६ दिसम्बर के बाद। काफी उत्तेजन हो गया। जो आपने समझ लिया, कंट्री ने समझ लिया, जस्टिस वर्मा कमेटी ने ये जो सुझाव दिया, सबके बाद आप लोगो ने स्त्रिन्जेंट लॉ बना दिया। अभी उसके ऊपर डेथ पेनल्टी का चर्चा कर रहे है। क्या फायदा हुआ आपको? क्या मिला? जब तक तो असलियत, जो असली ह्यूमन करैक्टर, जो सोसाइटी का कमिया आप ख़तम नहीं करना चाहेगे। और उसको ठीक तरीके से सुलझने के लिए आप लोग रास्ता नहीं ढूढेगे। आप का लॉ, और भी जो मर्जी जो करते रहिये। कुछ नहीं सुलझेगा।

चुतिया राम: हा. मैक्सवेल परेरा! आप सही हो। लेकिन ये सब जो श्रेष्ठता के भावना से ग्रस्त है। इससे काम नहीं चलेगा। मै बोल रहा हू कि ४०% क्राइम इंडियन लॉ लेके आई है। ३०% क्राइम इंडियन फिल्म इंडस्ट्री लेके आई है। ये सब लिगलियाये और फिल्मियाये होने के कारण बिलकुल ही विश्वास नहीं कर रहे होंगे। मै बोलता हू कि एक सेमिनार के आयोजन करो और इंडिया के टॉप १०० एक्सपर्ट्स को इकठ्ठा करो। मै ये साबित कर दूँगा और समस्या का समाधान भी कर दूँगा। जानता हू कि तुम सब ये कहोगे कि मै ही श्रेष्ठता के भावना से ग्रसित हू। लेकिन मेरे बिना कोई इस पहेली को सुलझा ही नहीं पायेगा।

कर भला, हो बुरा

Monday, May 6, 2013

Crime Patrol - Missing Mother - Episode 218 - 8th March 2013

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Is pornography leading to sexual crimes?


ये चर्चा हो रहा है गुड़िया के बलात्कार के बाद। तो चलो बलात्कार के मुलजिम प्रदीप की बात किया जाये। उसने अश्लील वीडियो अपने मोबाइल पर देखा और इज्जत लूटा। गाव में उसने अश्लील वीडियो देख के कभी ब्रीफ़केस लूटा तो कभी पैसा लूटा। सारा समस्या इस अश्लील वीडियो में है। इसलिए अश्लील वीडियो ब्लाक होना चाहिए। इनोवेटिव आईडिया है की नहीं? lol मेरा नाम है चुतिया राम। मेरे माँ बहनों ने बनाया मुझे चुतिया।

इस वकील का कहना है की अश्लील वीडियो से उत्तेजित होने पर व्यक्ति बलात्कार करता है। अच्छा है की मै अपने किराये की फ्लैट से बाहर नहीं निकलता हू। क्यों की किसी औरत के बलात्कार और हत्या के बाद मै भी पुलिस का संदिग्ध बनुगा। क्यों की मै भी अश्लील वीडियो इंटरनेट पर देखता हू। और पुलिस ISP से पता लगा लेगी की मैंने अश्लील वीडियो देखा था।

तुम लोग जो मर्जी वो कर लो। अश्लील वीडियो भी ब्लाक कर के देख लो। जब थक जाओ तो मेरे पास आ जाओ। नहीं तो लेट सबेर बुर्का मेथड हल बनेगा ही।

कर भला, हो बुरा

Aap Ki Adalat - Neeraj Kumar, Part 1



रजत शर्मा: मैंने अमिताभ बच्चन का स्टेटमेंट पढ़ा ट्विटर पर। उन्होंने कहा की जो पाच साल की लड़की से साथ जिन्होंने बलात्कार किया है। वो जानवर से भी बदतर है। इन लोगो को तो जनता के हवाले कर देना चाहिए। जनता अपने आप फैसला करेगी। 
चुतिया राम: वैसे, पाच साल की लड़की से साथ जिन्होंने बलात्कार किया है, उनलोगो को जनता के हवाले जुर्म साबित होने के बाद करना चाहिए कि पहले करना चाहिए?

नीरज कुमार: जनता कि भावना यही है कि ऐसे लोगो को कानून कि प्रकिया से गुजरने कि जरुरत नहीं है। उनको फौरन सजा दी जानी चाहिए। और ऐसी सजा देनी चाहिए। जो कि देखने कि काबिल हो। जैसा कि मिडिल ईस्ट में होता है। कि सरेआम लोगो के हाथ काट दिए जाते है। सरेआम लोगो के सर काट दिए जाते है। लेकिन हमारा समाज वैसा समाज नहीं है। 
चुतिया राम: अगर हमारा समाज वैसा समाज नहीं है तो जनता कि भावना ऐसी क्यों है कि उनको ऐसी सजा देनी चाहिए जो कि देखने कि काबिल हो?

नीरज कुमार: जुर्म कम होता है। जब पूरा क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम सुधर जाता है। 
चुतिया राम: आप भी लिगलिया गए हो नीरज कुमार। वैसे, ४०% क्राइम इंडियन लॉ लेके आई है। 

रजत शर्मा: इतनी बर्बरता समाज में है। इसका कारण कही ना कही पुलिस कि कमी तो होगी। 
नीरज कुमार: ये बिल्कुल गलत है। समाज कि कुरीतिया, समाज कि विकृतिया वो पुलिस कि वजह से नहीं है। 
चुतिया राम: नीरज कुमार! आप सही हो। ये सब लिगलियाये हुए है। क्या पुलिस २ बजे रात को प्रत्येक घर घुस के उन घरो के बेटियों की भोसड़ा चेक करे की उनका रेप हुआ की नहीं? ये तो सालो साल अपनी भोसड़ा उछाल उछाल के अपने घर में चुदवाती है ये समझते हुए की मजा मिल रहा है। फिर कुछ साल बाद कहती है कि सालो से उनका रेप हो रहा है। क्या नौटंकी है?

रजत शर्मा: आप कह रहे है कि दिल्ली पुलिस किसी महापुरुस कि इंतजार कर रही है जो आएगा और इन सबको कंट्रोल करेगा?
नीरज कुमार: दिल्ली पुलिस समाज की विकृतियों, समाज की वहशीपना, समाज के ह्यूमन इंस्टिक्ट, जो उसका प्रवर्त बिहेवियर है, जो देप्रविटी है, इसकी जिम्मेवार नहीं है। वो जिम्मेवारी हम नहीं लेते है। हमारी जिम्मेवारी में फर्क है। हमारी जिम्मेवारी प्रिवेंशन एंड डिटेक्शन ऑफ़ क्राइम है। लेकिन अगर कोई बर्बरता से क्राइम करता है तो उसने ये बर्बरता क्यों की, उसकी जिम्मेवारी दिल्ली पुलिस या कही की पुलिस नहीं ले सकती। 
चुतिया राम: आप सही हो नीरज कुमार। इन सब की दिमाग में ये बात नहीं घुसेगा। इंडियन लॉ इन्हें मतिभ्रमित की हुई है। ४०% क्राइम इंडियन लॉ लेके आई है। ३०% क्राइम इंडियन फिल्म इंडस्ट्री लेके आई है। मै ये प्रेडिक्शन साइंस से साबित कर सकता हू। ये प्रेडिक्शन साइंस मैथमेटिकल लॉजिक पर आधारित है। मै क्राइम भी बहुत ही आसानी दूर कर सकता हू। लोगो कि सोच में तेजी से बदलाव आएगी। श्रेष्ठ होने कि भावना छोड़ो और एक सेमिनार का आयोजन करो। क्राइम तो मै ही दूर कर सकता हू। तुम लोगो की वश नहीं।

रजत शर्मा: पुलिस की इतनी जिम्मेदारी तो है की लोगो में कही ना कही खौफ पैदा हो कि पुलिस हमारी इतनी इफिशियेंट है जिसने भी क्राइम किया तुरंत पकड़ा जायेगा। उसको सजा हो जाएगी। जब लोगो को सजा नहीं होती। जब लोग छुट जाते है। तो फिर जो क्राइम करने वाले उनकी हिम्मत बढ़ जाती है।
चुतिया राम: रजत शर्मा! अमेरिकन पुलिस इंडियन पुलिस से ज्यादे इफिशियेंट है। क्या अमेरिका में वलात्कार इंडिया से कम होता है? क्या आप वलात्कार इसलिए नहीं करते क्योंकि आपको पुलिस कि खौफ है? अगर हा तो इसका मतलब ये है कि जब आपको जिसदिन पुलिस कि खौफ नहीं होगी तो आप वलात्कार करोगे। प्रेडिक्शन साइंस से प्रूफ किया जा सकता है कि सभी लोगो में ऐसा खौफ पैदा कभी नहीं किया जा सकता। और जिन लोगो में ऐसा खौफ नहीं होगा वे तो क्राइम करेगे वशर्ते कि खौफ ही क्राइम को कम कर सकती है थ्योरी सही हो।

रजत शर्मा: इतने लोग यहाँ पर बैठे है। आप किसी से पूछ लीजिये। वे बतायेगे की पुलिसवालो का व्यवहार जनता के प्रति कैसा होता है।
चुतिया राम: ३०% क्राइम इंडियन फिल्म इंडस्ट्री लेके आई है (तुम सब आश्चर्यचकित होगे कि मै ये क्यों कहा)।

Audience Comment:

Adarsh Santuka: sir yeh to har film mian bante hai mahapurush , par unfortunately hakikat ki zindigi filmon se pare hai
hutia Ram: हा। इनकी दो लाइफ होती है। एक ड्रामा लाइफ और दूसरी रियल लाइफ। पहले इन बॉलीवुड वालो को भांड कहा जाता था। अब ये बॉलीवुड वाले सेलिब्रिटी बोले जाते है। नहीं विश्वास हो तो राजू श्रीवास्तव और रामदेव बाबा की आप के अदालत वाली विडियो देख लो।

कर भला, हो बुरा

Wednesday, May 1, 2013

Education is key, we have to change fundamental structure : Javed Akhtar



शिक्षा तो महत्व रखता है। सबसे अच्छा उदाहरण मेरे परिवार से दिया जा सकता है।

मेरे दादा जी तीन पास थे। जब मै छोटा था, प्रतिदिन सुबह में पहली मंजिल पे पूजा वाले कमरे में पूजा के बाद जब दादा जी को धूपबत्ती दूसरी मंजिल के छज्जे में तुलसी के पौधे को दिखानी होती थी। दादा जी मुझसे कहते, "जाके अपनी माँ से कह दो की वह बरामदे से हट जाये"।

मेरा भरुवा बाप दस फेल। जो की मेरे दादा जी से ज्यादे पढ़ा लिखा था। वह मेरे बहनों के भोसड़े के पीछे पड़ा था। लेकिन बेचारा मेरे बहनों का भोसड़ा नहीं पा सका। क्यों की हमारे संस्कृति में बेटियों की शरीर नहीं छुयी जाती (बशर्ते वो बच्ची न हो)।

मै बी. टेक. जो की अपने बाप से जयादे पढ़ा लिखा। मै अपनी छिनार माँ के भोसड़े के लिए इतना लालायित हू की मै चाहता हू की कोई मुझे काट के मेरी छिनार माँ के भोसड़े में डाल दे।

वैसे, मेरा बाप जिस समय मेरे बहनों के भोसड़े में पीछे पड़ा था उस समय मै कक्षा पाँच में था। काश! उस समय मै ज्यादे पढ़ा होता तो मै अपने बाप का साथ दिया होता। मै अपनी माँ को चोदता और मेरा बाप अपनी बेटियों को चोदता। मेरे घर में पहली मंजिल पर पूजा के लिए एक अलग कमरा है। जिसमें भगवान शिव के त्रिशूल है। उसके जगह देसी कट्टा होता। उस पूजा वाले कमरे में तिजोरी है। जिसमे गहने रखे जाते थे। उन गहनों के जगह कंडोम होता। उस पूजा वाले कमरे में दीवारों पर भगवान जी की तस्वीरे है। उन भगवान जी के तस्वीरों के जगह पोर्न एक्ट्रेस की तस्वीरे होते। उस पूजा वाले कमरे में वेद होते थे। जिसे दादा जी रोजाना पढ़ा करते थे। उन वेदों की जगह पे चुदाई की कहानिया होती। मै भी तो रोजाना हनुमान चालीसा पढ़ा करता था। जिसका फल ये है की आज मुझे भोसड़ा नहीं मिल रहा है। दूसरी मंजिल पर वीचो वीच में आंगन है जिसमे पूजा और हवन हुआ करता था। मै भी दादा जी और पाँच पंडित जी के साथ हवन किया करता और स्वाहा स्वाहा किया करता था। आज मेरे लाइफ की स्वाहा स्वाहा हो गयी है। पूजा और हवन के जगह पे मेरे बहनों को मुजरा होता। आंगन के बगल में बरामदा है। जहाँ पाँचो पंडित जी लोगो की भोग लगा करता। उसके जगह पे मेरे बहनों के दीवाने आते और मेरे बहनों के नाच पर रुपये लुटाते।

मेरे दादा जी बनिया (वैश्य) है। मेरे दादा जी गोरे थे। मेरा बाप सावला। मेरे बाप के बारे में दादा जी कहते थे की वह उनका औलाद नहीं है। वह तो चमार (दलित) के औलाद है। यह सुनकर लोग मेरे दादा जी के बारे में कहते थे की ये बुढ़ापे में सनक गए है। जब २००७ मै घर छोड़ा तो मैंने अपने बाप के बारे में बोला कि यह ऐसा आदमी है जिसके बाप ने कहा कि यह उनका औलाद नहीं है। आज मै इसका औलाद यह कहता हू कि यह मेरा बाप नहीं है। दो साल एक कमरे में बंद होने के बाद मुझे अपने गलती का अहसास हुआ। और मैंने अपने स्टेटमेंट में सुधार किया। और अपने बाप के बारे में बोला कि यह सही है कि यह अपने बाप के औलाद नहीं है। यह तो भीमराव अम्बेडकर के औलाद है। लेकिन मै इसी का औलाद हू। और उस समय मेरे शरीर में भड़वा खून दहाड़ मारने लगा।

कर भला, हो बुरा