Monday, May 6, 2013

Aap Ki Adalat - Neeraj Kumar, Part 1



रजत शर्मा: मैंने अमिताभ बच्चन का स्टेटमेंट पढ़ा ट्विटर पर। उन्होंने कहा की जो पाच साल की लड़की से साथ जिन्होंने बलात्कार किया है। वो जानवर से भी बदतर है। इन लोगो को तो जनता के हवाले कर देना चाहिए। जनता अपने आप फैसला करेगी। 
चुतिया राम: वैसे, पाच साल की लड़की से साथ जिन्होंने बलात्कार किया है, उनलोगो को जनता के हवाले जुर्म साबित होने के बाद करना चाहिए कि पहले करना चाहिए?

नीरज कुमार: जनता कि भावना यही है कि ऐसे लोगो को कानून कि प्रकिया से गुजरने कि जरुरत नहीं है। उनको फौरन सजा दी जानी चाहिए। और ऐसी सजा देनी चाहिए। जो कि देखने कि काबिल हो। जैसा कि मिडिल ईस्ट में होता है। कि सरेआम लोगो के हाथ काट दिए जाते है। सरेआम लोगो के सर काट दिए जाते है। लेकिन हमारा समाज वैसा समाज नहीं है। 
चुतिया राम: अगर हमारा समाज वैसा समाज नहीं है तो जनता कि भावना ऐसी क्यों है कि उनको ऐसी सजा देनी चाहिए जो कि देखने कि काबिल हो?

नीरज कुमार: जुर्म कम होता है। जब पूरा क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम सुधर जाता है। 
चुतिया राम: आप भी लिगलिया गए हो नीरज कुमार। वैसे, ४०% क्राइम इंडियन लॉ लेके आई है। 

रजत शर्मा: इतनी बर्बरता समाज में है। इसका कारण कही ना कही पुलिस कि कमी तो होगी। 
नीरज कुमार: ये बिल्कुल गलत है। समाज कि कुरीतिया, समाज कि विकृतिया वो पुलिस कि वजह से नहीं है। 
चुतिया राम: नीरज कुमार! आप सही हो। ये सब लिगलियाये हुए है। क्या पुलिस २ बजे रात को प्रत्येक घर घुस के उन घरो के बेटियों की भोसड़ा चेक करे की उनका रेप हुआ की नहीं? ये तो सालो साल अपनी भोसड़ा उछाल उछाल के अपने घर में चुदवाती है ये समझते हुए की मजा मिल रहा है। फिर कुछ साल बाद कहती है कि सालो से उनका रेप हो रहा है। क्या नौटंकी है?

रजत शर्मा: आप कह रहे है कि दिल्ली पुलिस किसी महापुरुस कि इंतजार कर रही है जो आएगा और इन सबको कंट्रोल करेगा?
नीरज कुमार: दिल्ली पुलिस समाज की विकृतियों, समाज की वहशीपना, समाज के ह्यूमन इंस्टिक्ट, जो उसका प्रवर्त बिहेवियर है, जो देप्रविटी है, इसकी जिम्मेवार नहीं है। वो जिम्मेवारी हम नहीं लेते है। हमारी जिम्मेवारी में फर्क है। हमारी जिम्मेवारी प्रिवेंशन एंड डिटेक्शन ऑफ़ क्राइम है। लेकिन अगर कोई बर्बरता से क्राइम करता है तो उसने ये बर्बरता क्यों की, उसकी जिम्मेवारी दिल्ली पुलिस या कही की पुलिस नहीं ले सकती। 
चुतिया राम: आप सही हो नीरज कुमार। इन सब की दिमाग में ये बात नहीं घुसेगा। इंडियन लॉ इन्हें मतिभ्रमित की हुई है। ४०% क्राइम इंडियन लॉ लेके आई है। ३०% क्राइम इंडियन फिल्म इंडस्ट्री लेके आई है। मै ये प्रेडिक्शन साइंस से साबित कर सकता हू। ये प्रेडिक्शन साइंस मैथमेटिकल लॉजिक पर आधारित है। मै क्राइम भी बहुत ही आसानी दूर कर सकता हू। लोगो कि सोच में तेजी से बदलाव आएगी। श्रेष्ठ होने कि भावना छोड़ो और एक सेमिनार का आयोजन करो। क्राइम तो मै ही दूर कर सकता हू। तुम लोगो की वश नहीं।

रजत शर्मा: पुलिस की इतनी जिम्मेदारी तो है की लोगो में कही ना कही खौफ पैदा हो कि पुलिस हमारी इतनी इफिशियेंट है जिसने भी क्राइम किया तुरंत पकड़ा जायेगा। उसको सजा हो जाएगी। जब लोगो को सजा नहीं होती। जब लोग छुट जाते है। तो फिर जो क्राइम करने वाले उनकी हिम्मत बढ़ जाती है।
चुतिया राम: रजत शर्मा! अमेरिकन पुलिस इंडियन पुलिस से ज्यादे इफिशियेंट है। क्या अमेरिका में वलात्कार इंडिया से कम होता है? क्या आप वलात्कार इसलिए नहीं करते क्योंकि आपको पुलिस कि खौफ है? अगर हा तो इसका मतलब ये है कि जब आपको जिसदिन पुलिस कि खौफ नहीं होगी तो आप वलात्कार करोगे। प्रेडिक्शन साइंस से प्रूफ किया जा सकता है कि सभी लोगो में ऐसा खौफ पैदा कभी नहीं किया जा सकता। और जिन लोगो में ऐसा खौफ नहीं होगा वे तो क्राइम करेगे वशर्ते कि खौफ ही क्राइम को कम कर सकती है थ्योरी सही हो।

रजत शर्मा: इतने लोग यहाँ पर बैठे है। आप किसी से पूछ लीजिये। वे बतायेगे की पुलिसवालो का व्यवहार जनता के प्रति कैसा होता है।
चुतिया राम: ३०% क्राइम इंडियन फिल्म इंडस्ट्री लेके आई है (तुम सब आश्चर्यचकित होगे कि मै ये क्यों कहा)।

Audience Comment:

Adarsh Santuka: sir yeh to har film mian bante hai mahapurush , par unfortunately hakikat ki zindigi filmon se pare hai
hutia Ram: हा। इनकी दो लाइफ होती है। एक ड्रामा लाइफ और दूसरी रियल लाइफ। पहले इन बॉलीवुड वालो को भांड कहा जाता था। अब ये बॉलीवुड वाले सेलिब्रिटी बोले जाते है। नहीं विश्वास हो तो राजू श्रीवास्तव और रामदेव बाबा की आप के अदालत वाली विडियो देख लो।

कर भला, हो बुरा

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