जब मैंने यूटूब विडियो पर यह टाइप किया, "Either Burqa OR I'm the solution. No Burqa in my solution."। जिसका हिंदी रूपांतरण है, "या तो मैं सलूशन हूँ या बुर्का सलूशन है। और मेरे सलूशन में बुर्का नहीं सलूशन है"। आकांशा प्रसाद मुझपर भड़क गयी। मैंने बोला कि मैं बुर्का नहीं पहना रहा हूँ। मैंने बताया कि यह मुहावरा है। कम शब्दों में तो मुहावरा ही लिखा जा सकता है। मैं इसका पूरा मतलब बताने के लिए तैयार हूँ। एक सेमिनार कराओ। जिसमे मैं इसका पूरा मतलब बता दूँगा। और औरतो के ऊपर से सारे क्राइम दूर कर दूँगा। अगर औरतो के ऊपर के समस्या का मेरा हल को नहीं पसंद आये तो मैं टार्चर टू डेथ पसंद करूँगा। (जारी) आकांशा प्रसाद ने मुझसे बोला था कि तुम एक सेमिनार तक नहीं व्यवस्था कर सकते हो। जिसका उत्तर मैं आज दे रहा हूँ। हाँ, मैं एक सेमिनार की नहीं व्यवस्था कर सकता हूँ। लेकिन इसका मतलब नहीं कि मेरा चैलेंज झूठा था। लोग अपने जीवन में बहुत कुछ कर पाते हैं और बहुत कुछ नहीं भी कर पाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति की अपना किसी विशेष क्षेत्र में कुशलता होती है। मुझे सेमिनार आयोजन करने में नहीं है। (जारी) आकांशा प्रसाद काफी झक मारने के बाद (हो सकता है कि आकांशा प्रसाद भारतीय महिला आयोग वगैरा गयी हो), सेमिनार की व्यवस्था अपने दिए समय सीमा पर नहीं करा पायी। उल्टे में वह सेमिनार का मतलब बताया कि लोगो की बात सुना जाता है और अपना भी विचार दिया जाता है। जहाँ तक मैं समझता हूँ कि यह सेमिनार नहीं बल्कि मीटिंग होता है। मैंने आकांशा प्रसाद से सेमिनार का बात किया था। मेरा सेमिनार से मतलब था कि तुम सब में से कुछ इकठ्ठे हो जाओ। जहाँ मैं औरतो के ऊपर अपराध के समस्या के हल बक दूंगा। और न समझ में आने पर मुझसे क्रॉस सवाल कर लेना। जहाँ तक मैं समझता हूँ की सेमिनार इनफॉर्मल रूप से एक क्लास रूम जैसा होता है। क्लास में टीचर होता है। जब कि सेमिनार में एक व्यक्ति किसी टॉपिक पर डिटेल रूप से अपना बात रखता है। क्लास में स्टूडेंट होते हैं। जब कि सेमिनार में लोग होते है। जिनका पोजीशन सेमिनार में टॉपिक पर बकने वाले के बराबर होता है। यानि की कोई छोटा और कोई बड़ा नहीं होता है। जब कि क्लास में टीचर बड़ा होता है और स्टूडेंट छोटे होते है। क्लास डेली होता है। जब कि सेमिनार आवश्यकता के अनुसार कभी कभार होता है। सेमिनार और मीटिंग में फर्क है। मीटिंग में एक से अधिक लोग अपनी बातो के रखते है। जितने भी सुनने वाले है; उनमे से सब अपने बातो को रख सकते हैं। आकांशा प्रसाद ने मेरे सेमिनार का मतलब मीटिंग से लिया था। नहीं विश्वास हो तो वह अपने ईमेल चेक कर ले। मेरे पास तो सारे ईमेल है। (जारी) बातो बातो में यूटूब पर आकांशा प्रसाद बोली कि वह बहुत सारी औरतो के समस्या का समाधान दी है। मैंने उससे जीमेल में पूछा कि तुम बोल रही हो कि तुमने बहुत सारे औरतो के समस्या का समाधान दी हो। उन बहुत सारी औरतो में किसी एक औरत में बारे में बताओ कि उसे क्या प्रॉब्लम था और तुमने क्या समाधान दिया। वह बोली कि मैं ईमेल पर नहीं लिख सकती। मैंने बोला कि कोई बात नहीं। जैसा की तुमने शुरू में मुझसे मोबाइल नंबर माँगा था। इसलिए मोबाइल पर बोल दो। वह नहीं तैयार हुई। वह बोली कि मुझे उसके पास जाना होगा जहाँ वह काम करती है। मैंने बोला कि कोई बात नहीं। तुम अपने ऑफिस का एड्रेस दे दो। वह बोली कि इन्टरनेट पर सर्च कर लो। मैं इन्टरनेट पर क्या सर्च करता? मुझे तो यह भी नहीं मालूम था कि वह काम कहाँ करती है। एनी वे, वह अपने ऑफिस यानि किसी विदेशी NGO का एड्रेस दिया। मैंने बोला कि यहाँ पर कांटेक्ट व्यक्ति कौन है? उसने बोला कि कोई नहीं है। फिर वहाँ जाकर किससे पूछता कि आकांशा प्रसाद ने जो बहुत सारी औरतो की हेल्प की है। उन औरतो में कोई एक औरत के बारे में बता दो कि क्या प्रॉब्लम था और आकांशा प्रसाद ने क्या हल दिया? यह भी एक जोक था। (जारी) (Continue...)
Wednesday, July 17, 2013
Personal Message with Aakansha Prasad
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