Tuesday, December 15, 2015

मैंने क्यों लिखा कि मैं एक गुलाम एम्पायर हूँ।


यह पोस्ट मेरे ब्लॉग की सबसे बड़ी पोस्ट होनी चाहिए। इसलिए मैं समय का ध्यान रखते हुए इस पोस्ट को सबसे अंत में रखा हूँ। इस पोस्ट को अंत में रखने का दूसरा कारण यह भी है कि इस पोस्ट को पिछले कुछ पोस्टो की आवश्यकता पड़ेगी। 

(जारी)

मैंने लिखा है कि मैं एक एम्पायर हूँ। तो तुम लोग यह भी पूछोगे, "कहाँ के एम्पायर हो?"। यह जरुरी नहीं है कि एक एम्पायर की राज्य हो। कभी कभार एक एम्पायर का राज्य छीन जाता है। फिर भी वह एम्पायर कहाँ जाता है। जैसे कि महाराणा प्रताप के राज्य छीन जाने के वावजूद भी वह राजा बोला जाता है। इस आधार पर राजा एक पोजीशन नहीं, बल्कि एक चरित्र को दर्शाता है; जो कि महाराणा प्रताप के साथ जुड़ा रहा। कभी कभार तो एक एम्पायर का राज्य होता ही नहीं है। एम्पायर और राज्य दो अलग शब्द हैं। वे एक दुसरे से कभी जुड़े हो सकते हैं और कभी नहीं। जब जुड़े हैं तो पोजीशन को दर्शाता है। और जब नहीं जुड़े हैं तो चरित्र को दर्शाता है। 

अब सवाल यह उठता है कि मुझे एम्पायर का चरित्र अपनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इसका कारण यह है कि मैंने देखा कि औरतो के अगेंस्ट क्राइम दूर करने के लिए कोई भी वास्तव में इंटरेस्टेड नहीं है। सब अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। कोई पॉलिटिशियन अपना पोलिटिकल बेनिफिट उठा रहा है। तो कोई महिला सामाजिक कार्यकर्ता चंदे के अनुसार बात कर रही है। औरतो के अगेंस्ट क्राइम दूर करने के प्रस्ताव रखने से पहले मैंने काफी सोचा विचारा। मुझे समझ में आया कि कोई इसे गलत तरीके से न ले। कोई यह न समझे कि मैं पॉलिटिक्स में आना चाहता हूँ। या कोई यह न समझे कि पैसे (चंदे) के लिए झुठमुठ का ही ड्रामा किया हुआ हूँ। इसलिए मैंने पहले एम्पायर डिक्लेअर कर के यह दर्शाया कि मैं इन सब चीजो से ऊपर हूँ। मुझे कोई पॉलिटिक्स में नहीं आना है। मुझे कोई मंत्री वगैरा नहीं बनना है। और दूसरा चीज यह कि मैं न्यूज़ मीडिया वगैरा में प्रचार करा कर पैसे वगैरा नहीं खर्च किया। बल्कि मैं सबके लिए ओपेन था। जब 'आकांशा प्रसाद' (Aakansha Prasad) नाम की लड़की मुझसे संपर्क किया। तो मैंने उसे न्यूज़ मीडिया वाला समझा और गूगल पर उसके नाम सर्च करने पर पहला लिंक 'आकांक्षा प्रसाद' (Akanksha Prasad, न कि आकांशा प्रसाद) का मिला। जो कि इंडिया टाइम्स न्यूज़ चैनल की एक मीडिया महिला थी। मैं उस चैनल पर अपना अकाउंट बनाया। और मैं उसे आकांशा प्रसाद समझते हुए उसे फॉलो कर दिया। ऐसे मैं सोचा था कि जब मैं प्रस्ताव रखूँ गा तो लोग मुझसे पूछेगे कि मैंने एम्पायर शब्द क्यों लिखा है; और प्रचार में न्यूज़ चैनल से संपर्क कर पैसे क्यों नहीं खर्च किये। लेकिन कोई नहीं मुझसे पूछा। 

एम्पायर का पहिचान उसके चरित्र से होता है। मैं पहले यहाँ चरित्र लिख देता हूँ। फिर प्रत्येक चरित्र को समझाऊगा। 
१. एम्पायर का पुरुष होना बेहतर है। 
२. एम्पायर इस पर ध्यान देता है कि क्या महत्वपूर्ण है, न कि नागरिको के ज्यादे मांग क्या है। 
३. एम्पायर अपना कम नागरिको का ज्यादे सोचता है।
४. एम्पायर दूरदर्शी होता है। 
५. एम्पायर के जान का खतरा होता है। 
६. एम्पायर गद्दारों का साथ नहीं देता है। 
७. एम्पायर पाखंडी नहीं होता है। 
८. एम्पायर अपने जबान पर टिका रहता है। 
९. एम्पायर को यह विल्कुल ही नहीं मायने रखता कि अधिकांश नागरिक उसके उठाए कदम से सहमत है या नहीं। बल्कि वह अपना कम सही दिशा में करता है। 
१०. एम्पायर अपना सुरक्षा जितना बन सके कर के रखता है। 
११. (जारी)

व्याख्या:

२. एम्पायर इस पर ध्यान देता है कि क्या महत्वपूर्ण है, न कि नागरिको के ज्यादे मांग क्या है:

इससे जुड़े पोस्ट: माधुरी दीक्षित को सन्देश, (जारी)।

एम्पायर और डेमोक्रेसी के पॉलिटिशियन के चरित्र में अंतर:
डेमोक्रेसी वोट पर आधारित होता है। डेमोक्रेसी में पॉलिटिशियन यह देखते हैं कि नागरिको के ज्यादे मांग क्या है; न कि क्या महत्वपूर्ण है। इस चीज को मैं एक बहुत ही अच्छे पॉलिटिशियन नरेन्द्र मोदी से अपना तुलना करने जा रहा हूँ। 
हरियाणा में दो समस्याएँ हैं-
१. लड़को की शादी। 
२. लड़कियों की सुरक्षा (जैसे कि लड़कियाँ घर से निकले तो निर्भय होकर निकले। उनके पीछे लड़के न पड़ जाये। और लड़के जबरजस्ती उन लड़कियों पर शादी के लिए दबाव न बनाये। और लड़की के न मानने पर लड़के उनके चेहरे पर तेजाब न फेक दे।)।
हरियाणा में लड़को की शादी की समस्या के हल की मांग ज्यादे है न कि लड़कियों की सुरक्षा की समस्या के हल। लेकिन देखा जाये तो लड़कियों की सुरक्षा का हल ज्यादे महत्वपूर्ण है न कि लड़को की शादी का हल। 
उन दो समस्याओ के हल:
१. लड़को की शादी की समस्या गांडी डायनेस्टी के अनुसार बेटी बचाओ के माध्यम से हल किया जा सकता है। 
२. लड़कियों की सुरक्षा के लिए गांडी डायनेस्टी ने बहुत सारे लॉ बनाये हैं। जो कि असरदायी नहीं है।
नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा के नागरिको के ज्यादे मांग को समझा। और उस आधार पर उन्होंने बेटी बचाओ अभियान शुरू कर दिया। जिसमे माधुरी दीक्षित भी शामिल थी। 
मेरे लिए यह मायने रखता है कि क्या महत्वपूर्ण है। इसलिए मैंने अभियान के एक विडियो पर थोड़ा ब्यंग करते हुए कमेंट किया था। वह नरेन्द्र मोदी को लिट करने वाली है। मेरा उद्देश्य नरेन्द्र मोदी को लिट करना है ही नहीं बल्कि यह बताना कि वह करो जो महत्वपूर्ण हो न कि जनता की डिमांड ज्यादे हो। 

अब सवाल यह उठता है कि जनता की डिमांड सबसे महत्वपूर्ण चीज पर क्यों नहीं है। उसके कई कारण हैं। मैं इस केस में कारण बता रहा हूँ। बेटी पैदा करने से पुरुषो को फायदे हैं। लड़कियों की सुरक्षा औरतो के फायदे की चीज है। पुरुष अपनों के लिए चिंता करते हैं। जब कि औरत अपने लिए चिंता करती है। यहाँ तक औरत उसका भी चिंता नहीं करती है जो उसकी चिंता करता है। बहुत ही स्वार्थी होती है। औरतो के हित के लिए काम करने वाली महिला सामाजिक कार्यकर्ता केवल अपने फायदे की सोचती हैं न कि औरतो के फायदे के। इसलिए महिला सामाजिक कार्यकर्ता डोनेशन की ज्यादे चिंता करती हैं। डोनेशन देने वाले पुरुष होते हैं। और वे पुरुष पुरुषो की चिंता करते हैं। यही कारण है कि जनता का डिमांड लड़को की शादी में ज्यादे है। 

(जारी)

मैंने गलत नहीं कहा कि औरत उसका भी चिंता नहीं करती है जो उसकी चिंता करता है। सबसे बड़ा उदाहरण मैं हूँ। मैं तीन साल औरतो के अगेंस्ट सारे क्राइम दूर करने के लिए प्रस्ताव रखा। इसलिए मैं सलूशन पसंद न आने पर टार्चर टू डेथ का बात किया था। जब कि यही औरते मेरे अगेंस्ट मेरे मौत के लिए साजिस रची। मेरे दुसरे ब्लॉग पढो। तो सब कुछ साफ़ हो जायेगा। 

(जारी)

२. एक एम्पायर का पुरुष होना बेहतर है। 

इससे जुड़े पोस्ट: (जारी)।

मैंने गलत नहीं कहा कि औरत अपने लिए चिंता करती है न कि अपनों के लिए। सबसे बड़ा उदाहरण औरत पॉलिटिशियन को देखने को मिलता है। बुरा न मानो तो ममता बनर्जी के बंगाल उठा कर देख लो; जहाँ रेप बढ़ गये हैं। मैंने तो अपने परिवार स्तर पर अपने दादा को देखा था। फिर भी मैं ओखली में अपना सर डाला। क्यों कि अपने दादा के साथ था। संसार के इतिहास उठाकर देख लो। जब समाज पर औरतो का शासन होता है तो समाज टूट कर जमीन पर आ जाता है। मैंने बर्तमान और भुत काल का बात किया; भविष्य की नहीं। 

(जारी)

३. एक एम्पायर अपना कम जनता का ज्यादे सोचता है।

इससे जुड़े पोस्ट: (जारी)।

जैसे कि बेटी बचाओ अभियान में मैंने ब्यंग तो नरेन्द्र मोदी पर किया था। लेकिन नरेन्द्र मोदी मेरे फायदे की बात कर रहे थे। जब कि मैं औरतो के फायदे को सोचता था। क्यों कि मैं यह देख रहा था कि क्या महत्वपूर्ण है। 

(जारी)

४. एम्पायर दूरदर्शी होता है। 

इससे जुड़े पोस्ट: (जारी)।

जब मैंने तक किया कि मुझे औरतो के अगेंस्ट सारे क्राइम को दूर करना चाहिए। क्यों कि इस वक्त केवल मैं ही कर सकता हूँ। सवा बिल्लिओन्स क्या ७ बिल्लिओन्स भी यह नहीं कर सकते हैं। तब उसी वक्त अपना संभावित भविष्य सोच लिया था। क्यों कि यह गांडी की डायनेस्टी क्राइम की तो कमाई करती है। 

(जारी)

५. एम्पायर के जान का खतरा होता है। 

इससे जुड़े पोस्ट: (जारी)।

चूँकि गांडी डायनेस्टी क्राइम की कमाई करती है। और मैंने बोला कि मैं औरतो के अगेंस्ट सारे क्राइम तो दूर कर दूँगा। तब उसी समय गांडी डायनेस्टी से मेरे जान का खतरा हो गया। 

(जारी)

६. एम्पायर गद्दारों का साथ नहीं देता है। 

इससे जुड़े पोस्ट: (जारी)।

जब मुझे मालूम चला कि मेरे अगेंस्ट साजिस में औरते आगे हैं। तो मैंने तुरंत अपना प्रस्ताव वापस ले लिया। 

(जारी)

१०. एम्पायर अपना सुरक्षा जितना बन सके कर के रखता है। 

इससे जुड़े पोस्ट: (जारी)।

मैं न केवल अपने रेंटेड फ्लैट के बाहर नहीं निकलता हूँ। बल्कि बाहर से अपना फ्लैट भी लॉक करवा कर रखता हूँ। 

(जारी)

९. एम्पायर को यह विल्कुल ही नहीं मायने रखता कि नागरिक उसके उठाए कदम से सहमत है या नहीं। बल्कि वह अपना कम सही दिशा में करता है। 

इससे जुड़े पोस्ट: कैलाश सत्यार्थी को सन्देश, (जारी)।

जैसे कि जब मुझे लग गया कि सवा बिल्लिओन्स मेरे अगेंस्ट साजिस उतर आये। तब से मैंने अपने ब्लॉग के पोस्ट के माध्यम से तुम सवा बिल्लिओन्स को समझाना प्रारंभ कर दिया हूँ। यह नहीं मायना रखता है कि तुम सवा बिल्लिओन्स समझो या न समझो। यहाँ तक कि तुम सवा बिल्लिओन्स मेरे पोस्ट पढ़ने में इंटरेस्टेड हो और या न हो। फिर भी मैं लिखे जा रहा हूँ। क्यों कि मेरे पास यही सही दिशा है। जब तुम सवा बिल्लिओन्स की पागलपंती उतरेगी। तुम सवा बिल्लिओन्स को मेरा बात समझ में आयेगा। 
नोट करने की बात यह है कि यह बकवास काम नहीं है। जैसे कि जंगल में आग लगने पर एक चिड़िया एक बूंद पानी से आग बुझाने गयी। 

(जारी)

यह टॉपिक अपने बाकी टॉपिको को पूर्ण करने के बाद ही उठाना चाहिए। क्यों कि यह बेकार के कंटेंट बढ़ रहे हैं। दुसरे पोस्ट इस पोस्ट के रिफरेन्स में यूज़ किया जा सकता है। 
इसलिए मैं मेरी शादी, मैंने सबका भला चाहा वगैरा पोस्ट को कम्पलीट करने जा रहा हूँ। उसके बाद तुरंत इस पोस्ट पर आऊँगा। 

(जारी)

अंग्रेजी संस्करण:
Why have I Written Myself as a Slave Empire

अंत में, मैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कहूँगा कि पशु पक्षियों को मत खाओ; और उन्हें मत तंग करो। अगर गाय भैस वगैरा को पालो तो उन्हें मान दो; और उनके गले में मत रस्सी बाधो। नहीं तो अपने पतन की रफ़्तार तेज कर लिए। यह मेरे समूह विवाद सिद्धांत के आधार पर है; जो कि मैंने अपने रूम मे जिक्र किया था। 

(hutiaram.blogspot.in)

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