hutia Ram
गांडी जो था, तुम सब का बाप, उसे बापू बोलते हो न, आत्महत्या करने की कोशिश किया और यह डायनेस्टी भीख में लाया। कैसे समझाऊ तुम सब को कि अपराध गांडी डायनेस्टी में बढ़ा है। एनी वे, ऐसे क्राइम के लिए केवल मैं ही सलूशन हूँ। सॉरी बुर्का मेथड। मेरी जिंदगी तो नर्क बन गयी है। यह बहुत ही चीप लगता है कि मैं यूटूब वगैरा सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर घंटो कमेंट किया करता हूँ और समझाने की कोशिश करता हूँ कि मैं ये सब क्राइम दूर कर सकता हूँ। इसमें कोई भी महिला विशेष मैंटेनस खर्च नहीं है। इसके लिए तुम सब इकठ्ठे हो जाओ। जहाँ मैं अपना सलूशन बक दूंगा। इसके लिए मैं फेल होने पर 'टार्चर टू डेथ' की शर्त स्वीकार करता हूँ। एक तुम सब हो कि इस श्रेष्ठता की भावना से ग्रसित हो कि अगर हम नहीं कर सकते तो यह चुतिया राम कैसे कर सकता है और मेरे कमेंट तो स्पैम घोषित कर देते हो। भले ही तुम सब क्राइम की झाट नहीं उखाड़ पाते हो। एनी वे, इस कमेंट के बाद मैं एक आध साल के लिए न्यूज़, यह क्राइम शो, अपना ईमेल वगैरा नहीं देखूँगा। इसलिए अगर तुम वन बिल्लिओंस की गांड फट जाती है और मुझे सम्पर्क करोगे तो एक साल बाद ही जबाब दूंगा।Guddu Zehri
मैं आपके साथ हुhutia Ram
+Guddu Zehri अब लेट हो गयी है। कारण जानने के लिए मेरे लेटेस्ट पोस्ट को पढ़ लेना। यहाँ बुर्का मेथड से मतलब इस्लाम से था। क्यों की इस्लाम एक सलूशन है। यह मुस्लिम जानते हैं। इस्लाम सलूशन क्यों है? वह मैं जानता हूँ।Guddu Zehri
+hutia Ram आप बहुत समय से गायब थे ??hutia Ram
+Guddu Zehri जब मेरा बात कोई नहीं सुना और मैं थक गया। तो मैं इस प्रोफाइल पर कमेंट करना बंद कर दिया और अपोजिट रूप से बैताल राज से बात किया जिससे की लोग hutia Ram के बातो पर विचार करे। उसके बाद मेरे सारे म्यूच्यूअल फण्ड और शेयर टूट गए जो कि मैंने रेगुलर जॉब के दौरान कमाया था। तब मैं काम की और मुड़ा तो पाया की मेरे मारने की साजिस हो रही है। प्रेजिडेंट ऑफ़ इंडिया भी जानता है। अब मैं मौत की वेट कर रहा हूँ। गुडडू! PK और बजरंगी भाईजान देख लेना। मेरे लेटेस्ट ३ - ४ ब्लॉग पढ़ लेना। सबकुछ क्लियर हो जायेगा। जीवन में मांस मत खाना। शाकाहारी पशु और पच्छियो को तंग मत करना।Guddu Zehri
+hutia Ram राम जी में आपसे बहुत प्रभावित हु और मांस खाने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता क्योकी में पशुप्रेमी हु मेरा डेरी का व्यवसाय है मेरे पास 6 गाये और 5 भेस है जो की हमारे जीविका का मुख्य स्त्रोत है !! और आप बार बार ये मुझे मारने की साझीस वाली बात क्यों कर रहे हो, आपको कोई क्यों मारना चाहेगा ?? भाई कही आप डिप्रेशन में तो नहीं ??hutia Ram
+Guddu Zehri गुडडू! मैं विल्कुल ही डिप्रेशन में नहीं हूँ। हाँ, लोग यही साबित करना चाहेंगे कि मैं डिप्रेशन में था, इसलिए मर गया। "या तो मैं पागल हूँ या सवा बिल्लिओन्स पागल हैं।" मैं इस स्टेटमेंट पर तो अभी भी कायम हूँ। मैं सवा बिल्लिओन्स की पागलाहत दूर करने की कोशिश किया। जब कि सवा बिल्लिओन्स मुझे पागल बनाने में मेहनत किया। पागल मैं हूँ की सवा बिल्लिओन्स? यह ७ बिल्लिओन्स मेरे मरने के बाद बतायेगे। ऐसे भी मैं आत्महत्या करता हूँ तो यह नहीं साबित होता है कि मैं डिप्रेशन में था। क्यों कि मेरे पैसे ख़त्म हो गए। सड़क पर भूखो तड़प के मरने से अच्छा है कि आत्महत्या करो। आमीर खान ने मुझे जोक बना कर PK फिल्म बनाये और ६०० करोड़ से भी ज्यादा कमाए। सलमान खान भी मुझे जोक बना कर बजरंगी भाईजान फिल्म बनाया और ६०० करोड़ से भी ज्यादा कमाया। यह सलमान यह शो करने में लगा है की वह फिल्म मेरे ऊपर नहीं है। मैं जनता हूँ, सलमान जानता है और स्टोरी राइटर जानता है की बजरंगी भाईजान फिल्म मेरे ऊपर बनी है। बाकी और कोई जाने या न जाने। सवा बिल्लिओंस पूछोगे की मुझे कैसे मालूम है तो मैं बताना भी जरुरी नहीं समझता हूँ। ऐसे भी मुझे इनसे एक पैसा भी नहीं चाहिए। अब इन दोनों में एक वह अब पैसा मेरे बर्बादी पर खर्च कर रहा है। यानी मुझसे भाग्य पाया और पैसा कमाया। और उस पैसे से मेरे जीवन में दुर्भाग्य ला रहा है। सवा बिल्लिओंस पूछोगे की मुझे कैसे मालूम है तो मैं बताना भी जरुरी नहीं समझता हूँ। मैं अकेला हूँ। सवा बिल्लिओन्स झूठ पर ऊतर आये तो मैं क्या कर सकता हूँ? यह ७ बिल्लिओन्स मेरे मरने के बाद बतायेगे। मैंने दावा किया कि बिना सजा दिए अपराध के भावना को खत्म कर दूंगा। जब की यह डायनेस्टी बिना सजा दिए मुझे खत्म कर रही है। जब में मैं कोई अपराधी नहीं हूँ। और तो और यह डायनेस्टी अपराधियों को नहीं खत्म कर रही है। मैंने औरतो की भला चाहते हुए प्रपोजल रखा और तीन साल में अपने सारे पैसे खर्च कर दिया। जो पैसे मैंने रेगुलर जॉब के दौरान कमाया था। यही औरते उससे पैसे पाकर मेरे जीवन में बर्बादी ला रही है। औरत क्या होती हैं और समझ में आ रहा है। ये दोनों आमीर खान और सलमान इन सवा बिल्लिओंस की ४९% औरतो के नजर में ऊँच हो गए और मैं नींच हो गया। गुडडू! सब कुछ जानते हुए भी बहाना बना रहे हो? अबनोर्मल इवेंट (कम्युनिकेशन वगैरा) में एक पहेली छिपी होती है। कुरुक्षेत्र युद्ध के समय विदूर ने खांडवप्रस्त जाने से पहले युधिष्तिर से बन में आग लगने का प्रश्न किया था। बाकी पांडव ने इस प्रश्न को नार्मल लिया था। लेकिन युधिष्तिर ने साजिस की बू ले लिया था। जो पहेली बोले हो समझ में आ रहा है। जन्म से मेरा एक नाम था राम। जिस पर मेरे सारे सर्टिफिकेट हैं। रेगुलर जॉब के दौरान कुछ लड़कियाँ जबरजस्ती मेरे दुश्मन बन गयी। जिनसे बचने के लिए मैंने फ्रीलान्स वेबसाइट पर पुकार का नाम "बैताल" रख लिया। लेकिन बैक में फ्रीलान्स वेबसाइट जानती थी कि मैं राम हूँ न कि "बैताल"। लेकिन राम के नाम से मैं इस दुनिया में फिट नहीं बैठा। तो मैंने न्यूज़ पेपर में पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस का प्रयोग अपना नाम राम से आलोक में बदल लिया। और मैं मोस्ट कॉमन मानव बिहेवियर अपना लिया। दुर्भाग्य बस मैं आलोक के रूप में नहीं रह पाया और औरतो के अगेंस्ट क्राइम दूर करने की चुतियापे पर उतर आया। क्यों कि जो भी औरतो का भला करता है। उसका बुरा दुर्दशा होता है। और मैंने अपना नाम "hutia Ram" रख लिया। hutia में 'C' एब्सेंट हैं। मेरे लेटेस्ट ब्लॉग पढ़ लिए? उसमे बहुत कुछ लिखा है। मैं ब्लॉग कमाने के लिए नहीं लिखता हूँ। यह तो साफ़ साफ़ दिख रहा है। जीवन के कुछ ही पल रह गए हैं। इसलिए जो भी पूछोगे जबाब दूंगा। मेरे मरने के बाद तो अफवाह उड़ेगा ही। एनीवे, ललित मोदी, राधे माँ वगैरा जाने ही जायेगे। काफी मेहनत करके कमेंट टाइप कर रहा हूँ। एडमिनिस्ट्रेटर यह कमेंट ही हटा दे रहा है। यह साजिस नहीं तो क्या है?Guddu Zehri
+hutia Ram शायद में आपके विचारो को समझने लगा हुआ, मुझे लगता है आप अपने आप को बुराई के खिलाफ उठने वाली हर आवाज के रूप में समझते हो, जो कि किसी न किसी साजीस के तहत दबा दी जाती है ??hutia Ram
+Guddu Zehri मैं व्यक्तिगत रूप से किसी बुरे व्यक्ति के खिलाफ आवाज नहीं उठा रहा हूँ। न कि हर अपराध पर प्रोटेस्ट के लिए निकलूँ। बल्कि मैं यह कह रहा था कि मैं लोगो का माइंड ऐसा बदल दूंगा कि लोग अपराध ही न करे। जैसे कि कोई व्यक्ति इतना बुरा होता है कि वह अपनी ही बेटी कर रेप कर देता है। जब की सामान्य व्यक्ति के मस्तिष्क में ऐसा ख्याल सपने में भी नहीं उठता। इसका कारण पुलिस कर डर नहीं, बल्कि उसका माइंडसेट है जो कि बचपन से ही बना होता है। मैं इस माइंडसेट का बात कर रहा था। उदाहरण तौर पर, ज्योति सिंह पाण्डेय (दिल्ली गैंगरेप) के केस में लोग प्रोटेस्ट किये और मुजरिमों को सजा दिलाने की बात किया। मैं तो इस प्रोटेस्ट में शामिल हुआ ही नहीं। मैं तो अपने रूम से बाहर निकलता भी नहीं था और निकलता भी नहीं हूँ। मेरा दावा यह है कि मैं लोगो की माइंडसेट ऐसा बदल देता कि लोग ऐसा अपराध करते ही नहीं। उनके अन्दर क़ानून का डर नहीं, बल्कि करुणा की भावना होता और डर होता भी तो ब्रह्माण्ड स्वामी का डर होता। यह अल्टीमेट चैलेंज था। सवा बिल्लिओन्स क्या ७ बिल्लिओन्स भी नहीं कर सकते हैं। मुझसे कोई भी ढंग से नहीं बात किया। पूरी न्यूज़ मीडिया जानती थी कि सालो से प्रपोजल रख रहा हूँ, फिर भी चुप थी। बोलोगे कि मुझे कैसे मालूम है। तो यह बता पाना मेरे लिए मुश्किल है। एक न्यूज़ मीडिया का पहला एक्शन होता है कि वह फूटपाथ से न्यूज़ कॉन्टेंट इकठ्ठा करे। मैं तो कमेंट न्यूज़ विडियो के नीचे टाइप करता था। एक न्यूज़ मीडिया का दूसरा एक्शन होता है कि वह अफवाह न फैलाये। सत्य बात करे, अर्धसत्य बात न करे। जैसे कि किसी ने मोदी को लिट किया। कोई राधे माँ है। ये फिल्म मीडिया मुझे जोक बनाते हुए फिल्मे और सोप ओपेरा बनायीं और फिल्मे काफी सफल हुए। अब ये फिल्म मीडिया न्यूज़ मीडिया के साथ होकर मेरे अगेंस्ट साजिस रचना स्टार्ट कर दिया। और मेरे अगेंस्ट मेरे पीछे अफवाह फैलाया। बोलोगे कि मुझे कैसे मालूम है। तो यह बता पाना मेरे लिए मुश्किल है। जब कोई मेरे मुह पर सीधे बात करे तो मैं जबाब दूँ। लेकिन सवा बिल्लिओन्स टूट पड़े हैं। मेरे कमाई के साधन यानि सॉफ्टवेर कॉन्ट्रैक्ट पर वार किया है। पैसे तो खत्म हो गए इस महीने। अब आत्महत्या ही एक रास्ता है। मैंने ऑनलाइन किसी को परेशान नहीं किया। अगर किसी को लगता है कि मैं परेशान कर रहा हूँ। तो सवा बिल्लिओन्स और यह डायनेस्टी मुझे सीधे मना कर सकती थी। सजा देना जरुरी नहीं है। लेकिन यह डायनेस्टी मुझे सजा देने में भीड़ गयी। और कोई जुर्म न बनने पर अफवाह फैलाई और सवा बिल्लिओन्स ने बोला कि तुम्हे ऑनलाइन देख लेंगे। मैं उन सवा बिल्लिओन्स को अपने ब्लॉग पोस्ट के द्वारा पूछा कि तुमलोगों ने मुझे ऑनलाइन कब परेशान नहीं किया? यहाँ तक कि औरतो ने मुझे ऑफलाइन छोड़े ही नहीं, तभी तो मात्र ऑनलाइन ही सहारा था। अगर मैं इतना बड़ा अपराधी हूँ कि ऑनलाइन सवा बिल्लिओन्स का परेशान कर दिया। इसके लिए कोई लॉ ही नहीं है? यहाँ तक यहाँ कमेंट पर रिप्लाई कर रहा हूँ। उसे लोग स्पैम घोषित कर देते हैं। क्योकि बैताल राज प्रोफाइल पर यह कमेंट दिखायी ही नहीं देता। ऑनलाइन परेशान कौन कर रहा है? मैं कि वो? चोर कौन है? मैं कि फिल्म मीडिया? जब ये लोग मेरे अगेंस्ट साजिस कर रहे थे तो इसी बीच मुझे लंका और कुरुक्षेत्र युद्ध मालूम चला। और जिस तरह से ये लोग मेरे पास आत्महत्या की रास्ता छोड़ रहे हैं। उसी तरह राम के साथ भी तो यही हुआ था। राम ने भी आत्महत्या किया था और कृष्ण के रूप में पैदा हुए थे और हिसाब हुआ था। जो भी पूछना है जल्दी पूछो। क्योकि मेरे पास कुछ ही दिन शेष रह गए हैं।Guddu Zehri
भाई मैंड सेट करना कैसे संभव है आप कहते है कि लोगो में अपराध के प्रती ईश्वर का डर पैदा करना ताकी कोई अपराध करे ही नहीं, भाई वास्तव में दुनिया में बहुत सी बाते इश्वर इस दुनिया में इश्वर के डर से ही संतुलित है अन्यथा इंसान और पशु में कोई भी फर्क नहीं होता !! बहुत सी बाते किसी भी व्यक्ती के पारीवारीक माहोल पर निर्भर करती है की उसका व्यक्तीत्व विकाश किस माहोल में हुआ है !! या सीधे कहे की उसे कैसे संस्कार मिले है ! जैसा की आप कह रहे है कि माइंड सेट तो ये भी किसी भी व्यक्ती के लिए उसके मानसीक विकाश पर निर्भर करता है जो कि सिर्फ बचपन में ही संभव है !! hutia Ram
+Guddu Zehri मेरे इन लाइन्ड कमेंट को पढो - [Guddu Zehri] भाई मैंड सेट करना कैसे संभव है [hutia Ram] माइंड सेट करना विल्कुल ही संभव है। जिस प्रकार भारतीय कानून का दावा है कि यह कड़ा सजा देकर और डरा कर लोगो का माइंड सेट कर देगा। उसी प्रकार लोगो को धार्मिक डर होता है। सामाजिक डर होता है। और व्यक्तिगत लेवल पर भी डर होता है। यानि दसो (बेस ४ पर) लेवल कर डर होता है। वह है धार्मिक, सामाजिक, राजनितिक (कानूनी) और व्यक्तिगत स्तर। सवा बिल्लिओन्स केवल राजनीतिक यानि की प्रशासन के डर और व्यक्तिगत लेवल के डर पर विचार करते हैं। इसलिए वे बोलते हैं कि प्रशासनिक स्तर पर कमिश्नर ऑफ़ पुलिस को रात के २ बजे तक सड़क पर दौराओ, व्यक्तिगत स्तर पर लड़कियों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दो वगैरा वगैरा। जैसे कि धार्मिक लेवल पर बरदान और श्राप होता है। सामाजिक लेवल पर प्रशंसा और शिकायत होता है। राजनीतिक लेवल पर रिवॉर्ड और सजा होता है। व्यक्तिगत लेवल पर सहायता और मारा मारी होता है। दूसरा अंतर जैसे कि अगर १ क्राइम व्यक्तिगत लेवल पर कण्ट्रोल होती है तो १००,००० (बेस ४ पर) क्राइम लीगल लेवल पर कण्ट्रोल होती है। वैसे ही अगर १ क्राइम लीगल लेवल पर कण्ट्रोल होती है तो १००,००० (बेस ४ पर) क्राइम सामाजिक लेवल पर कण्ट्रोल होती है। वैसे ही अगर १ क्राइम सामाजिक लेवल पर कण्ट्रोल होती है तो १००,००० (बेस ४ पर) क्राइम धार्मिक लेवल पर कण्ट्रोल होती है। यह तो मैंने दो ही अंतर बताया। लेकिन इन दसो (बेस ४ पर) लेवल में सहस्त्रो यानि १,००० (बेस ४ पर) यानि ६४ (बेस १० पर) अंतर होते हैं। यहाँ मैं नंबर सिस्टम बेस ४ का प्रयोग कर रहा हूँ। प्राचीन भारत में नंबर सिस्टम बेस ४ के थे। बाद में नंबर सिस्टम बेस १० के हो गए। इसलिए राम का वनवास आठ साल (८ = ४ + ४) से १४ साल (१४ = १० + ४) हो गए। पुरे लंका और कुरुक्षेत्र युद्ध के कथा मे नंबर गड़बड़ होने का यही कारण है। जैसे की शत का मतलब १६ (बेस १० पर) और १०० (बेस ४ पर), न कि १०० (बेस १० पर)। इसलिए भले ही कौरव कुमारो के १०० (बेस १० पर) नाम उल्लेखित हैं। लेकिन वे उतने ज्यादे थे ही नही। यहाँ राम का बात छेड़ा तो एक मजेदार बात बताना चाहूँगा की राम साउथ बिहार के थे। वही भगवान विष्णु हैं न कि भगवान विष्णु के अवतार हैं। कैसे सामाजिक लेवल पर माइंड सेट करे? यह बताने में अब मैं विल्कुल ही इंटरेस्टेड नहीं हूँ। मैं मरना पसंद करूँगा। लेकिन बताना नहीं। २ - ४ पीढ़ी में समाज टूट के जमीन पर आयेगा और शरिया लॉ ही सलूशन बचेगा। ये सब मैं अपने रूम में बकता था। लोग छुपकर मुझे मॉनिटर करते हैं। उनके पास इससे रिलेटेड मेरे ऑडियो रिकॉर्ड होंगे। वे काफी कुछ ये सब सुने होंगे। जिसका सारांश मैंने यहाँ बका। जहाँ तक मुझे सामाजिक डर की बात है। मेरा इज्जत बचा ही कहाँ? मैं तो अपनी माँ बहनों को इन्टरनेट पर गाली देता हूँ। और सब पढ़ते हैं और मुझ पर हसते हैं। लोग मेरे बारे में बहुत से अफवाह भी उड़ायें हैं। [Guddu Zehri] आप कहते है कि लोगो में अपराध के प्रती ईश्वर का डर पैदा करना ताकी कोई अपराध करे ही नहीं, भाई वास्तव में दुनिया में बहुत सी बाते इश्वर इस दुनिया में इश्वर के डर से ही संतुलित है अन्यथा इंसान और पशु में कोई भी फर्क नहीं होता !! [hutia Ram] अगर लोगो को के अन्दर ईश्वर का डर होता तो सवा बिल्लिओन्स मेरे जान के पीछे भी नहीं परते। वे मांस नहीं खाते। जानवर अधिकार कहता है कि कोई अपने फायदे के लिए दुसरे का भक्षर नहीं कर सकता। जानवर अधिकार इन दसो (बेस ४ पर) स्तर में व्यक्तिगत स्तर पर आता है। मानव अधिकार जानवर अधिकार के सबसेट है। मैंने अपने रूम में इन दसो (बेस ४ पर) स्तर में धार्मिक स्तर पर ग्रुप थ्योरी का जिक्र किया था। उसी ग्रुप थ्योरी पर मैं तो बस यह समझाना चाहूँगा कि जानवरों को मत खाओ और मत तंग करो। अगर दूध वगैरा के लिए गाय और भैसों को पालते हो तो उन्हें प्यार दो और मान दो। गले में रस्सी मत बाँधो। जहाँ तक मेरे अन्दर ईश्वर के डर की बात है। मैं तो डरता ही हूँ। मैंने बचपन से निरीक्षण किया है कि लोगो का बरदान और श्राप का असर बहुत होता है। विश्वास करो या न करो लेकिन सुपरनेचुरल इवेंट नेचुरल रूप से होता है। जब से मुझे मालूम चला कि लंका और कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान क्या हुआ था। कौन किसका पुनर्जन्म था और कैसे उसके पाप और पुण्य का हिसाब हुआ। तब से मुझे मालूम है कि मेरा भी हिसाब होगा। क्योकि पाप कभी भी फलित नहीं होता है। इस जन्म नहीं तो अगले जन्म पाप का हिसाब होगा। राम को आत्महत्या के लिए बाध्य किया था। मुझे भी किया जा रहा है। [Guddu Zehri] बहुत सी बाते किसी भी व्यक्ती के पारीवारीक माहोल पर निर्भर करती है की उसका व्यक्तीत्व विकाश किस माहोल में हुआ है !! या सीधे कहे की उसे कैसे संस्कार मिले है ! [hutia Ram] मैं अब सामाजिक स्तर पर कुछ नहीं कहूँगा। मुझे अपना चैलेंज मायने रखता है। वह यह कि या तो मैं सलूशन हूँ या इस्लाम। अब तो मैं चाहूँगा कि समाज जल्द से टूट कर जमीन पर आ जाये। जिससे कि इस्लाम सलूशन बने। [Guddu Zehri] जैसा की आप कह रहे है कि माइंड सेट तो ये भी किसी भी व्यक्ती के लिए उसके मानसीक विकाश पर निर्भर करता है जो कि सिर्फ बचपन में ही संभव है !! [hutia Ram] भला माइंड सेट किसी व्यक्ति की मानसिक विकास पर नहीं आधारित होता है। सामान्यतः बिना मानसिक विकास के एक बच्चे के पास भला माइंड सेट होता तो है। माइंड सेट कभी भी बदल जाता है। लेकिन समय लगता है। इस कमेंट तो कॉपी कर के लोगो में भी फैला देना। शायद गांडी डायनेस्टी मेरे मरने के बाद प्रोफाइल को ब्लाक कर दे।English Version
Of course, It is possible to set mind. The way, Indian law claims that it will set mind by creating fear by giving hard punishment. Similar way, people have religious fear, social fear and personal level fear. So there are 10 (at base 4) levels of fears. Those 10 (at base 4) levels are religious, social, political (legal) and personal. One billion consider only legal and personal level fears. So they expect patrolling of the commissioner of police till 2 am (at administrative level) and they expect martial arts training for girls (at personal level) etc. The way, at religious level, there are curse and wish. Similar way, at social level, there are praise and complaint. At political level, there are reward and jail. And at personal level, beating and help. Second difference; if 1 crime is controlled by personal level, 100,000 (at base 4) crimes are controlled by legal level. Similar way, if 1 crime is controlled by legal level, 100,000 (at base 4) crimes are controlled by social level. Similar way, if 1 crime is controlled by social level, 100,000 (at base 4) crimes are controlled by religion level. These are just two differences. But there are sahastra 1,000 (at base 4) i.e., 64 (at base 10) differences among these 10 (at base 4) levels. Here I'm using number system base 4. In Ancient India, it was used number system of base 4. Later it was used number system of base 10. So lord Rama's exile became 14 (14 = 10 + 4) years at the place of 8 (8 = 4 + 4) years. This is the reason of number system mismatch in Lanka and Kurukshetra wars. Another example: Shat means 16 (at base 10) and 100 (at base 4), rather than 100 (at base 10). So no matter it has been specified 100 (at base 10) kaurav kumars, but in a real sense, they were not so much. Now I'm quite not interested in saying how to set mind at social level. I will prefer to die over saying about it. After 2 or 4 generations, social system will be broken and only sharia law will be an option. I used to prepare for seminar to speak at social system correction in my room. People secretly use to monitor me. They might have audio records related to this. They might listen a lot of about social system what I didn't talk here and about 10 (at base 4) levels what I talked here a little bit. As far as it is about me, I don't have any social image. I used to abuse my mother and sisters. Everyone laughs at me on reading my abusive blogs. People rumored about me. If people really have the fear of god, they wouldn't force me to suicide. They wouldn't eat meat. Animal right says that no one can eat another for own benefit. Animal rights come under personal level among these 10 (at base 4) levels. Human right is a subset of Animal rights. I spoke about group dispute theory under religious level among these 10 (at base 4) levels. Using that group dispute theory, I will like to tell you guys not to eat animal and not to torture them. If you guys keep cows or buffaloes for milk, love and respect them and never use any cord. As far as it is about me, I have the fear of god. I have observed since my childhood that it has a strong effect of curse and wish of others. Believe or not, but it is true. Supernatural events happen in a natural way in my life. Since when I knew what happened during Lanka and Kurukshetra wars... Who was the rebirth of whom? How sin were punished by the god? I know that there will be judgement for me too. Lord Rama was forced to commit suicide and I'm also being forced. Now, I will not say anything about social level. My challenge matters, i.e., Either Islam or I'm the solution. Now I will like social system broken. So that Islam will be the solution. A gentle mindset is not dependent on the mental development of a person. Generally a kid having undeveloped mental state has gentle mindset. Mindset can be changed any time. But it takes time. Distribute this matter among public. Probably my profile may be blocked after my death.Guddu Zehri
इस्लाम सलूशन है इससे आपका क्या मतलब है जबकी वो तो हमारे विचारों के एक दम उलट है !! सर्वाधीक मांस का भक्षण इस्लाम धर्म के अनुयायी ही करते है !! आप पशुओ के गले में रस्सी न बाँधने को कहते है जबकी इस्लामो में तो औरतो को की पशुको की तरह चार दिवारी में रखा जाता है और अगर बहार जाए तो बुरखे में, इस्लाम में औरतो के पास अधिकार बहुत कम है पती अगर चाहे तो 3 बार तलाक तलाक तलाक करके पत्नी को छोड़ सकता है, यानी की औरत मात्र एक उपभोग के वास्तु है, जो लोग इतने रूडीवादी है वो सलूशन कैसे हो सकते है !!hutia Ram
अगर इस्लाम आपके विचारो से उल्टा है तो क्या इस्लाम सलूशन नहीं हो सकता? पहले यह बताओ कि हिंदुत्व सलूशन है? दहेज़ में औरतो को जलाते हो। आग में औरतो को झोक कर सती मैया की जय बोलते हो। कन्याभ्रूण हत्या करते हो। क्या यह सलूशन है? अगर इस्लाम सलूशन नहीं है तो इस्लामिक लॉ एक एक कर के इंडियन लॉ में क्यों डाल रहे हो? रेप करने पर मृत्युदंड का कॉन्सेप्ट इस्लाम में ही है। जो कि इंडियन लॉ अब प्रयोग कर रही है। अब हिन्दुओ में भी बेटी प्रॉपर्टी में हिस्सा ले रही है। यह इस्लाम में पहले से ही है। सर्वाधिक मांस का भक्षण इस्लाम धर्म के अनुयायी ही करते है। इसलिए तो इस्लाम में खून खराबा होता है। इसलिए मैंने बोला कि जानवरों को न खाओ और न तंग करो। यह मैंने सारे धर्म के लोगो के लिए बोला। और मैं कोई धर्म लेकर नहीं आ रहा था। हिंदुत्व में औरतो को आजादी है बाहर जाने की। लेकिन L शेप रॉड का प्रयोग करो रेप के लिए। और वह तड़प कर मरे। क्या कोई औरत बाहर जाना चाहेगी? सोनी चैनल के अलावा और भी चैनल के क्राइम शो उठा कर देखो तो मालूम चलेगा कि कुछ हिन्दू लड़कियों ने लड़को से तंग आकर दुपट्टा से अपना चेहरा ढका था। ऐसे क्राइम पट्रोल का फॉर्मेट बहुत ही अच्छा होता है। लेकिन सप्ताह में मात्र २ से ३ दिन ही दिखाता है। क्राइम पट्रोल को मैं कभी नहीं मिस करता था। लेकिन अब तो सोप ओपेरा ही देखना बंद कर दिया हूँ। एक हिन्दू भी अपनी औरत को छोड़ सकता है। इसके लिए वह न्यायालय जाये। बात वही हुआ। सोनी चैनल के अलावा और भी चैनल के क्राइम शो उठा कर देखो तो मालूम चलेगा कि कुछ हिन्दू सुबह शाम अपने पत्नी को पिटते थे जिससे कि वह तलाक के लिए राजी हो जाये। ऐसे क्राइम पट्रोल का फॉर्मेट बहुत ही अच्छा होता है। लेकिन सप्ताह में मात्र २ से ३ दिन ही दिखाता है। क्राइम पट्रोल को मैं कभी नहीं मिस करता था। लेकिन अब तो सोप ओपेरा ही देखना बंद कर दिया हूँ। इस्लाम में औरतो के पास अधिकार कम है? जैसे की प्रॉपर्टी शेयर वगैरा। इसका डिस्कशन किसी मुस्लिम से कर लो। कुछ हिन्दू भी औरत को उपभोग की वस्तु मानते हैं। जब से ये सवा बिल्लिओन्स की ४९% औरते मेरी बर्बादी चाहने लगी। तब से मैं भी एक औरत को यही मानता हूँ। किरण बेदी की आप की कचहरी में मैंने देखा कि एक हिन्दू आदमी अपनी औरत से सेक्स ही करता था। जब कि कोई जिम्मेदारी नहीं उठाता था। और तो और उसने एक और शादी कर रखा था। क्या हिन्दू रुढ़िवादी नहीं हैं? एक ही गोत्र में शादी करने पर हरियाणा में ऑनर किलिंग के केस नहीं आते हैं? मेरे सलूशन में सभी खुश हो जाते और बोलते यही है राईट चॉइस अहा!। लेकिन किसी ने सुना ही नहीं। जब से औरतो ने मेरे अगेंस्ट साजिस रची हैं। तब से मैं अब स्वयं चाहता हूँ कि हिन्दू सोशल सिस्टम जल्दी से जल्दी इस्लामी सोशल सिस्टम की ओर मुड़े। जिससे कि मेरा चैलेंज जल्दी से जल्दी सत्य साबित हो। अगर हिन्दू सोशल सिस्टम इस्लामिक सोशल सिस्टम की ओर मुड़ता है तो मैं इसका कारण नहीं, बल्कि सवा बिल्लिओन्स हैं। हिन्दू सोशल सिस्टम इस्लामिक सोशल सिस्टम की ओर बहुत पहले से ही मुड़ना स्टार्ट हो गया था। जिसे मैं ओखली में अपना सर डाल कर रोकने आया था। अब अगर इस्लामिक लॉ की जिक्र करोगे। किसी भी कीमत में उसे गलत नहीं ठहराऊगा। अगर १६ दिसम्बर का प्रोटेस्ट तीसरा युद्ध था तो मैं महर्षि विश्वामित्र का पुनर्जन्म हूँगा। और आमिर खान लंका युद्ध के समय मायासूर के और बाद में वे मुहम्मद साहब के पुनर्जन्म होंगे। मेरे ही लॉ थे जिससे संसार के सारी औरतो की स्थिति अच्छी है। जो कि ३ - ४ पीढ़ी के बाद खत्म हो जाएगी। ऐसे मेरे लॉ तो लंका युद्ध से समय ही टूट चुके थे। फिर भी ५००० सालो तक असरदायी रहा। अब या तो मुहम्मद साहब की लॉ आयेगी या क्राइम बढ़ेगी।Guddu Zehri
आपकी बाते तो एक दम सही है लेकीन भारतीय न्याय व्यवस्था बेहद लचीली, पैसे वालो की गुलाम और नेताओं के हाथ की रखैल, भारतीय न्याय व्यवस्था में एसा बहुत की कम देखने को मिलता है की किसी नेता या अमीर इंसान को कोई सजा हुए है जबकी गरीबो का हर जगह शोषण होता है, जहा न्याय व्यवस्था की चौपट है वहा क्राइम कम कैसे किया जा सकता है !!hutia Ram
भारतीय न्याय व्यवस्था तो दसो (बेस ४ पर) लेवल में राजनीतिक लेवल पर आती है। अगर भारतीय न्याय व्यवस्था चौपट है तो इसका मतलब यह नहीं कि क्राइम कम नहीं किया जा सकता। क्योकि क्राइम तो राजनीतिक स्तर के अलावा धार्मिक, सामाजिक और व्यक्तिगत लेवल पर भी कंट्रोल होते हैं। बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था चौपट होने से राजनीतिक स्तर पर कम क्राइम कंट्रोल होंगे। जैसे कि कोई बाप अपनी ही बेटी का रेप करता है। जब कि सामान्यत: कोई बाप ऐसा करना सपने में भी नहीं सोच सकता। इसका कारण सामान्यत: एक बाप को कानून का ही डर नहीं, बल्कि धार्मिक, सामाजिक और व्यक्तिगत लेवल का डर है। इसलिए न्याय व्यवस्था चौपट हो या न हो; सामान्यत: एक बाप धार्मिक, सामाजिक और व्यक्तिगत लेवल के डर के कारण ऐसा कर ही नहीं सकता। केवल डर ही कारण नहीं है, बल्कि और भी कारण है। डर तो इन दसो (बेस ४ पर) लेवल में एक प्रोपर्टी है। जैसे कि मैंने इन दसो (बेस ४ पर) लेवल में दो पास के लेवल के वीच क्राइम कण्ट्रोल अनुपात (१ : १००,०००) अपने पिछले कमेंट में समझाया था। उदाहरण तौर पर अगर १०००००,०००००,००००० (बेस ४ पर) क्राइम हो और धार्मिक स्तर उन सारे क्राइम तो कण्ट्रोल कर सकता हो तो सामाजिक स्तर केवल १०००००,००००० (बेस ४ पर) ही क्राइम कण्ट्रोल करेंगा। और राजनीतिक स्तर केवल १००००० (बेस ४ पर) क्राइम ही कण्ट्रोल करेगा। और व्यक्तिगत स्तर केवल १ ही क्राइम को कण्ट्रोल करेगा। इसका मतलब की आपने मेरे पिछले कमेंट को ढंग से नहीं पढ़ा। मेरे पिछले कमेंट को पढ़ो और दूसरे से पढ़ाओ। जिससे की क्लियर हो। आपकी एजुकेशन लेवल कितनी है? और आपकी ऐज? मेरे कमेंट तो कॉपी कर लेना। क्योकि गांडी डायनेस्टी मेरे प्रोफाइल को ब्लाक या डिलीट कर सकती है। और जो भी पूछना हो। जल्दी पूछो। क्योकि मेरे पास गिन के दिन रह चुके हैं। मैं सारे डिस्कशन को (http://hutiaram.blogspot.com/2015/11/guddu-zehri-mind-set.html) लिंक पर रख रहा हूँ। Indian Law system comes under political (legal) level among 10 (at base 4) levels. If Indian Law system is malfunctioning, it doesn't mean that crime can't be controlled. Because besides political level, crime is controlled by religious, social and personal level. So if Indian Law system is malfunctioning, crime will not be controlled at political level. For example: A father rapes his own daughter. Whereas generally no father can think to rape his own daughter even in his dream. Reason of this is that generally a father has a fear of god, society and person. So no matter law system malfunctions, generally a father can't do this due to fear of god, society and person (own daughter). There is not only fear the reason, rather there are various reasons. Fear is a property among these 10 (at base 4) levels. As I explained you crime control ratio (1 : 100,000) between 2 consecutive levels among 10 (at base 4) levels. For Example: if there are 100000,00000,00000 (at base 4) crimes and religious level can control all of these crimes, social level can control only 100000,00000 (at base 4) crimes and political level can control only 100000 (at base 4) and personal level can control only 1 crime. It means that you didn't read my previous comment seriously. Read my comments and let others read my comments. So that it will be clear. What is your education level? And what is your age? Copy my comment. Because Gandi dynasty can block or delete my profile after my death. Immediately ask whatever you have to ask. Because I have hardly a few days. I'm keeping all of the discussions at my blog link (http://hutiaram.blogspot.com/2015/11/guddu-zehri-mind-set.html). Finally, I will like to say the most important thing that never eat meat and never tease animals, birds etc. If you domesticate cows, buffaloes etc, love them and never fasten a cord in their neck; else you have increased the rate of your destruction. This is based on my group dispute theory what I discussed in my room; and you guys secretly recorded this. (hutiaram.blogspot.in)
Sunday, November 22, 2015
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